नयी दिल्ली, 01 सितम्बर (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी की दर का आंकड़ा भले ही मजबूत हो लेकिन विनिर्माण सहित कई क्षेत्रों में वृद्धि घट रही है जिससे साफ है कि मजबूत जीडीपी के बावजूद आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को जीडीपी के आंकड़ों पर कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी आंकड़ों को लेकर उत्साह अतार्किक है। जीडीपी के अप्रैल-जून के आंकड़ों में कुछ स्पष्ट विरोधाभास भी हैं, जिन पर एक जाने माने बैंक की रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं और इन सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण शहरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा, “शहरी खपत अब भी काफी कमजोर बनी हुई है, जबकि ग्रामीण खपत संरचनात्मक बाधाओं से जूझ रही है। जीडीपी की मामूली वृद्धि दर अब भी धीमी है और जनवरी-मार्च 2025 की तुलना में स्पष्ट रूप से कम है।”
उन्होंने कहा कि लाभ वृद्धि के विपरीत, विनिर्माण क्षेत्र में बिक्री की वृद्धि लगातार धीमी हो रही है। सामान्यतः उपभोग, निवेश और व्यापार जीडीपी वृद्धि के मुख्य निर्धारक हैं लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, तिमाही वृद्धि दर का पूरा 1.8 प्रतिशत अंक इन तीनों निर्धारकों से नहीं समझाया जा सकता। यह विसंगति काफी बड़ी है और इसे स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
कांग्रेस नेता ने जीडीपी पर अमेरिका के अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर कहा, “ट्रंप आयात शुल्क शॉक का असर इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़ों में नहीं दिखता। दरअसल, आयात शुल्क से बचने के लिए निर्यातकों ने पहले से ही अमेरिका को अतिरिक्त निर्यात (फ्रंट-लोडिंग) कर दिया था, जिससे निर्यात वृद्धि और जीडीपी के मुख्य आँकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, आयात शुल्क का वास्तविक असर दूसरी तिमाही से दिखाई देना शुरू होगा।
