कैनबरा, (वार्ता) आस्ट्रेलिया में भी भारत विरोधी बयार बहने की खबर आ रही है। वहां बसे भारतीय समुदाय के लोगों को आस्ट्रेलिया के लिए खतरा बताया जा रहा है और उसके खिलाफ नव-नाजी, नस्लवादी किस्म का आंदोलन चलाया जा रहा है। हालांकि आस्ट्रेलिया की सरकार ने नव-नाजी ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ आंदोलन की कड़ी निंदा की है और प्रदर्शनकारियों द्वारा आयोजित आव्रजन विरोधी रैलियों को नव-नाजी सहानुभूति, नस्लवाद और नफरत से जोड़कर देखा है।
ये रैलियां मेलबर्न, सिडनी, केर्न्स, ब्रिस्बेन जैसे बड़े शहरों में आयोजित की गईं और उनमें जमकर ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय को निशाना पर लिया गया।
इन रैलियों के बाबत ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ मंत्री मरे वाट ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हम सिडनी में हो रही मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया रैली की कड़ी निंदा करते हैं। इसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव बढ़ाना नहीं है।”
श्री वाट ने कहा, “हम ऐसी रैलियों का समर्थन नहीं करते जो नफरत फैलाने और हमारे समुदाय को विभाजित करने के लिए आयोजित की जाती हैं।” उन्होंने इन रैलियों को नव-नाजी समूहों द्वारा प्रायोजित और प्रचारित बताया।
बहुसांस्कृतिक मामलों की मंत्री ऐनी एली ने कहा कि सरकार सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के साथ खड़ी है। भले ही वे कहीं भी क्यों नहीं पैदा हुए हों। उनकी यह टिप्पणी उन लोगों के खिलाफ है जो लोगों को बांटना और प्रवासी समुदायों को डराना चाहते हैं।
विपक्षी नेता सुज़ैन ले ने पूरे ऑस्ट्रेलिया में होने वाले आव्रजन विरोधी प्रदर्शनों से पहले शांति और सम्मानजनक व्यवहार का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सभी को अपने विचारों को व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन नस्लवाद और अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि इन रैलियों और प्रदर्शनों में विशेष रूप से ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय को निशाना बनाया गया, जो आस्ट्रेलिया की वर्तमान जनसंख्या का तीन प्रतिशत है। इस पोस्टर में लिखा था कि पांच वर्षों में भारतीयों की संख्या 100 वर्षों में इटालियंस और यूनानियों से ज्यादा होगी।
प्रदर्शनकारियों ने इसके अतिरिक्त लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली देश की वामपंथी सरकार की भी आलोचना की और प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से पद छोड़ने की मांग की।
इस आंदोलन को ऑस्ट्रेलियाई लोगों द्वारा मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है जिनमें से कई ने इसे विशुद्ध रूप से नस्लवादी-घृणा-श्वेत वर्चस्ववादी आंदोलन बताया है क्योंकि इसमें भारतीयों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है और इसका नेतृत्व श्वेत ऑस्ट्रेलियाई कर रहे हैं। हालांकि आयोजकों ने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि प्रवासियों में सबसे बड़ा हिस्सा उन्हीं का है और यह नस्लीय रूप से प्रेरित नहीं है।
‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ ने कहा है कि वे केवल बड़े पैमाने पर आप्रवासन को समाप्त करने का आह्वान कर रहे हैं क्योंकि यह देश को बर्बाद कर रहा है और विशेष रूप से उच्च मुद्रास्फीति, कम विकास दर, बिगड़ते जीवन स्तर और गिरती वास्तविक मजदूरी के कारण आर्थिक रूप से पिछड़े ऑस्ट्रेलिया में अब और अधिक आप्रवासियों को समायोजित करने की क्षमता नहीं है।
