कैलाश मित्तल
इंदौर: हर साल 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे मनाया जाता है, जो न सिर्फ इस कला के प्रति श्रद्धा का दिन है, बल्कि उन लाखों शौकिया और पेशेवर फोटोग्राफर्स को सलाम करने का अवसर भी, जो लम्हों को तस्वीरों में तब्दील कर अमर बना देते हैं. इस अवसर पर यह कहना पूरी तरह उपयुक्त है कि ‘फोटोग्राफी के लिए डिग्री नहीं, दिल चाहिए.
फोटोग्राफी कोई पाठ्यक्रम नहीं, एक एहसास है. यह एक ऐसा नजरिया है जो सामान्य से दृश्य में भी असामान्य सुंदरता खोज लेता है. कैमरा तो महज़ एक उपकरण है, असली फोटोग्राफर की पहचान उसकी संवेदनशील नज़रों और भावनाओं से होती है. किसी तस्वीर में मुस्कान, पीड़ा, आशा या आश्चर्य तब ही उतरता है, जब फोटोग्राफर का दिल उन भावों को महसूस करता है.
आज के दौर में मोबाइल हर हाथ में है, कैमरा हर जेब में है- लेकिन हर कोई फोटोग्राफर नहीं होता. एक सच्चा फोटोग्राफर वह है, जो किसी दृश्य को सिर्फ देखता नहीं, जीता है, और उस पल को महसूस कर तस्वीर में ढालता है. तकनीक सिखाई जा सकती है, पर संवेदनशीलता नहीं.
ऐसे कई नामचीन फोटोग्राफर्स हुए हैं जिन्होंने कोई डिग्री नहीं ली, फिर भी उनकी तस्वीरें दुनियाभर के लोगों की आत्मा को छू गईं क्योंकि उन्होंने कैमरे से नहीं, दिल से तस्वीरें खींची.इस वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर हम उन सभी को नमन करते हैं जो दिल से तस्वीरें बनाते हैं, और हर फ्रेम के ज़रिए दुनिया को एक नई नज़र से देखने का मौका देते हैं.
