आयुष्मान आरोग्य मंदिर बदरा के छत का गिरा प्‍लास्‍टर

अनूपपुर। विकासखंड कोतमा अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर बदरा में आज सुबह लगभग 10 बजे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) द्वारा गर्भवती महिला की जांच के दौरान अचानक एएनसी कक्ष की छत का भारी प्लास्टर एएनसी टेबल पर आ गिरा। इस हादसे में गर्भवती महिला बीनू तांबे पति सुनील तांबे निवासी बीमा ग्राम तो सुरक्षित बच गईं, लेकिन उनके पति सुनील तांबे को हल्‍की चोटे आई है, जिसके बाद सीएचओ उमा साहू ने प्राथमिक उपचार किया।

जर्जर भवन में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

गौरतलब है कि बदरा का यह आयुष्मान आरोग्य मंदिर वर्षों से जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इसे एनक्यूएएस क्वालिटी सर्टिफिकेशन दिलाने में सफल हो गए। जर्जर भवन को महज पुताई-पालिश कर चमका दिया गया और निरीक्षण टीम को गुमराह कर दिया गया। अप्रैल माह में यह केंद्र एनक्‍यूएएस में क्वालिफाइड घोषित किया गया था, लेकिन पहली ही बारिश ने सारी पोल खोल दी। डिलीवरी प्वाइंट होने के बावजूद इस जर्जर भवन में प्रसव सेवाएं दिया जाना महिलाओं और शिशुओं के जीवन को सीधा खतरे में डालना जैसा है।

पहले भी हो चुके हैं हादसे

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले ही एक तेज रफ्तार हाइवा वाहन अस्पताल की दीवार से टकराकर एएनसी कक्ष और लेबर रूम को क्षतिग्रस्त कर चुका है। वहीं, ओपीडी कक्ष का छज्जा पूरी तरह टूटा हुआ है। हर कक्ष की दीवार और छत की प्‍लास्‍टर धीरे-धीरे गिर रहा है। बरसात में अस्पताल में पानी भरने और प्लास्टर गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

जिम्मेदारों की लापरवाही

घटना की सूचना मिलते ही बीएमओ डॉ. के.एल. दीवान मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्होंने महज मलबा हटाने के निर्देश दिए न तो किसी तकनीकी जांच की बात कही गई और न ही भवन को असुरक्षित घोषित किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवन को रंग-रोगन कर फाइलों में सब ठीक दिखाना, अधिकारियों की गंभीर लापरवाही है। आज बड़ा हादसा टला है, लेकिन कल किसी की जान भी जा सकती है। यहां मरीजों को प्राथमिक उपचार से लेकर प्रसव जैसी सुविधाएं इसी जर्जर भवन में दी जाती हैं। गर्भवती महिलाएं भवन की हालत देखकर भयभीत हो जाती हैं और कई बार प्रसव सेवाओं से इंकार कर देती हैं। बावजूद इसके जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी इस स्थिति की अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों और कर्मचारियों ने बार-बार सूचना दिये जाने के बावजूद सीएमएचओं ने भवन को असुरक्षित मानने के बजाय उसी में सेवाएं चालू रखीं है। जिसके कारण गर्भवती महिलाओं सहित उपचार कराने वाले मरीजों, कम्‍यूनिटी हेल्‍थ ऑफिसर तथा हाउसकीपिंग रोज मौत के साये में काम कर रहे हैं, लेकिन सीएमएचओं ने कभी उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दिया।

एनक्यूएएस प्रक्रिया में गड़बड़ी

जिला स्‍तर से मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी द्वारा इस जर्जर भवन को क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए भेजा गया, जो गंभीर लापरवाही उजागर करती है। जब भवन पूरी तरह जर्जर था तो एनक्यूएएस के लिए कैसे क्वालिफाइड किया गया, निरीक्षण टीम ने भवन की स्थिति बिना देखे कागजों में सब ठीक दिखा दिया गया। एनक्‍यूएएस में बदरा सेंटर का नाम आने के बाद मजबूरी वश सीएचओं ने जेएस के पैसों से जर्जर भवन की छतों और दीवारों पर पुट्टी का लेप लगवाकर रंग रोगन कराया गया और 21 अप्रैल को हुए वचुर्वल एनक्‍यूएएस में क्‍वालीफाइड भी हुई। बावजूद इसके बाद अब तक सीएचओं को 1लाख 26 हजार का पुरूस्‍कार राशि मिली और ना एनक्‍यूएएस की तैयारी के लिए वाली 50 हजार रूपये की राशि भी प्राप्‍त नही हुई है।

इनका कहना है

पूरे मामले की सूचना मिली है, जांच प्रतिवेदन मांगा जा रहा है।

डॉ. आर.के. वर्मा, सीएमएचओं अनूपपुर

इनका कहना है

सीएमएचओं को तत्‍काल निर्देशित किया गया है कि जाकर उक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का अवलोकन कर भवन जर्जर पाये जाने पर उसे अन्‍य जगह सिफ्ट करें।

तन्‍मय वशिष्‍ठ, जिला पंचायत सीईओ अनूपपुर

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