काबुल, 09 अगस्त (वार्ता) अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने कहा है कि अफगानिस्तान पड़ोसी देशों से प्रवासियों के जबरन निर्वासन की सबसे बड़ी मुश्किलों से जूझ रहा है , जहाँ इसी वर्ष अब तक निर्वासित 15 लाख अफगानियों को वापस लाया गया है।
अफ़ग़ान प्रवासियों को निर्वासित करने के पाकिस्तान के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए संगठन ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के बिना अफनिस्तान को एक गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने कहा, “अफनिस्तान हाल के इतिहास में सबसे बड़े मुश्किलों में से एक का सामना कर रहा है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन तत्काल अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का आह्वान कर रहा है। सितंबर 2023 से ईरान और पाकिस्तान से 40 लाख से ज्यादा अफन लौट चुके हैं, जिनमें से 15 लाख से ज़्यादा अकेले 2025 में लौटें हैं।”
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महिला ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पड़ोसी देशों से निर्वासित प्रवासियों में लगभग आधी संख्या महिलाओं और लड़कियों की है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने आगे कहा कि निर्वासित महिलाओं और लड़कियों को अफ़ग़ानिस्तान लौटने पर गरीबी, कम उम्र में शादी, हिंसा और अभूतपूर्व प्रतिबंधों जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता ने आगे कहा, “ इस साल ईरान से लौटने वालों में एक तिहाई महिलाएँ और लड़कियाँ हैं और पाकिस्तान से लौटने वालों में लगभग आधी महिलाएँ और लड़कियाँ हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान की सभी महिलाओं और लड़कियों की तरह, वापस लौटने वाली महिलाओं और लड़कियों को भी गरीबी, कम उम्र में शादी, हिंसा, शोषण और उनके अधिकारों, आवाजाही और स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व प्रतिबंधों का ख़तरा बढ़ जाता है।”
टोलो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वासित महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की चिंताओं के जवाब में तालिबान सरकार ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के सभी अधिकारों की रक्षा की जा रही है।
