नयी दिल्ली, 08 अगस्त (वार्ता) बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को लोक सभा की कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो पूर्व राज्यपाल दिवंगत सत्यपाल मलिक को श्रद्धांजलि देने के बाद विपक्षी दलों के सदस्य एसआईआर के मुद्दे पर हंगामा करने लगे। इस पर अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित दी थी।
दोपहर 12 बजे सदन की पुन: समवेत होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य एसआईआर मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। कुछ सदस्य सदन के बीचों-बीच आ गये। कई सदस्य तख्तियां लिये थे, जिन पर एसआईआर विरोधी नारे लिखे थे।
हंगामे के बीच ही पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी ने विधायी दस्तावेज पटल पर रखवाये।
श्री तेन्नेटी ने शोरगुल कर रहे सदस्यों से अपने-अपने स्थानों पर जाने और कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा होनी है, सदस्य शोरगुल न करके इन विधेयकों पर चर्चा में भाग लें।
उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपनी समस्याओं को सदन में उठाने के लिए चुनकर भेजा है, जनता के प्रति सदस्यों की जवाबदेही है। रोज-रोज हंगामा करके सदन की कार्यवाही बाधित करना कतई उचित नहीं है। वे प्रतिदिन ऐसा नहीं कर सकते। पूरा देश उनका आचरण देख रहा है। इस दौरान कुछ सदस्यों ने मेज थपथपायीं जिसे गंभीरता से लेते हुए श्री तेन्नेटी ने कहा, “मैं इसको बहुत गंभीरता से लेता हुं, इसे रिकॉर्ड में लिया जाये।” उन्होंने कहा कि सदस्य अपने-अपने स्थानों पर जायें, वह उन्हें बोलने का अवसर देंगे, उनकी बात सुनेंगे। विपक्षी सदस्यों पर पीठासीन अधिकारी की अपील का कोई असर नहीं हुआ।
इस पर श्री तेन्नटी ने कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले पूर्वाह्न 11 बजे एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी थी।
श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व सदस्य सत्यपाल मलिक के निधन की जानकारी दी और सदन की ओर से श्री मलिक को श्रद्धांजलि दी गयी। श्री बिरला ने नौ अगस्त 1942 को शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन के बारे में भी सदन को अवगत कराया और वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद अध्यक्ष ने प्रश्नकाल आरंभ किया तो विपक्षी दलों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए सदन के बीचो-बीच आ गये और हंगामा करने लगे। हंगामे के बीच उन्होंने प्रश्न काल चलाने का प्रयास किया लेकिन शोर शराबा बढ़ता गया।
श्री बिरला ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि प्रश्न काल महत्वपूर्ण होता है, इसलिए कार्यवाही चलने दें। सदन में नारेबाजी करना संसदीय परम्परा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि वे नियोजित तरीके से सदन को बाधित कर रहे हैं, जिसे पूरा देश देख रहा है।
हंगामा कर रहे सदस्यों पर जब श्री बिरला के आग्रह का कोई असर नहीं हुआ और हंगामा बढ़ता ही गया तो उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।
