अनियमितताओं के कारण रोकना पड़ा पश्चिम बंगाल का मनरेगा का पैसा: शिवराज

नयी दिल्ली, 04 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल के विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुये सोमवार को कहा कि राज्य सरकार मनरेगा के क्रियान्वयन में पूरी तरह विफल रही है, जिसके कारण योजना के लिए दिया जाने वाला पैसा रोकना पड़ा।

श्री चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि पश्चिम बंगाल सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में बुरी तरह विफल रही है। साल 2019 से 2022 के बीच केंद्र की टीमों ने पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में जांच की, जिसमें मनरेगा के कार्यों में भारी अनियमिततायें पायी गयीं। टीमों ने पाया कि कई कार्यस्थलों पर वास्तव में काम हुआ ही नहीं था, नियम विरुद्ध कामों को हिस्सों में तोड़ा गया और धन की हेराफेरी की गयी। इन्हीं कारणों से ग्रामीण विकास मंत्रालय को मनरेगा अधिनियम की धारा 27 के तहत राज्य का पैसा रोकना पड़ा।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के मामले में भी शिकायतें मिलीं कि राज्य सरकार ने अपात्र परिवारों का चयन किया, पात्रों को हटाया और योजना का नाम बदलकर नियमों की अनदेखी की। ये सारी शिकायतें राष्ट्रीय और केंद्रीय निगरानी टीमों द्वारा सही पायी गयीं।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार ने सुधार या पारदर्शिता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा, “ दुर्भाग्यवश, पश्चिम बंगाल सरकार विश्वास, जिम्मेदारी और पारदर्शिता के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है। केंद्र सरकार बंगाल के लोगों के विकास, कल्याण और अधिकारों के लिए पहले

भी प्रतिबद्ध थी और आगे भी रहेगी। ”

उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के विकास, गांव-गरीब और मजदूरों के कल्याण तथा उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक अकेले केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ही पश्चिम बंगाल को 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न योजनाओं के जरिये दी है।

राज्य को मंत्रालय द्वारा जारी राशि का विवरण साझा करते हुये श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 16,505 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 25,798 करोड़ रुपये, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के तहत 274 करोड़ रुपये, मनरेगा (2014-15 से 2022 तक) के तहत 54,465 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में 3,881 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत 8,389 करोड़ रुपये सीधे पश्चिम बंगाल के गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचाये गये हैं।

 

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