भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि भावनायोग कोई चमत्कार नहीं, बल्कि यह एक आत्मिक संस्कार है जो तन, मन और चेतना को शुद्ध करता है। उन्होंने बताया कि भावना जैसे संस्कार बनाती है, वैसे ही व्यक्तित्व और कर्म फल बनते हैं। मुनि श्री ने चार चरणों प्रार्थना, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और सामायिक के माध्यम से भावनायोग की प्रक्रिया बताई, जो आत्मा की शांति और जागरूकता की ओर ले जाती है। इस अवसर पर उड़ीसा से पधारे श्रद्धालुओं का स्वागत हुआ। आज क्षमा धर्म पर प्रवचन व निर्वाणलाडू चढ़ाया जाएगा।
