मंडला:मंडला जिले के नारायणगंज विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बवलिया इन दिनों खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है। 1987-88 में बना यह भवन आज पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे 52 गांवों की लगभग 32 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला यह केंद्र खुद ही वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है।
बारिश के दिनों में प्रसूता महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रसव कक्ष की छत से लगातार पानी टपकता है, और इसी स्थिति में डिलीवरी कराई जा रही है, जो कि जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। दीवारों पर सीलन और दवाइयों के भंडारण कक्ष की दुर्दशा से दवा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बवलिया स्वास्थ्य केंद्र का भवन रंग-रोगन कर सजाने की औपचारिकता जरूर निभाई गई, लेकिन छत और दीवारों की मरम्मत नहीं हुई। मरीजों के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं है और रात में प्रसूताओं के परिजन खुले में या टपकती छत के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं। रुकने व भोजन बनाने की कोई सुविधा नहीं है, जिससे पीड़ित परिवार और अधिक परेशान होते हैं।ग्राम धनगांव की मुन्नी भारतीय ने कहा डिलीवरी तो हो गई, लेकिन रात में रुकने की बहुत परेशानी हुई। अस्पताल में सुविधा नाममात्र की है। शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों में हैं।
ग्राम बनार की अंजू मरावी ने बताया बारिश के समय पानी टपकता रहा और बैठने की भी जगह नहीं थी। खाना बनाने की भी कोई जगह नहीं थी। प्रशासन को तुरंत ध्यान देना चाहिए।”स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन का पद लंबे समय से रिक्त है। इसके कारण सामान्य जांचों के लिए भी मरीजों को निवास, नारायणगंज या मंडला भेजा जाता है, जिससे समय, पैसा और जीवन तीनों की बर्बादी होती है। समय पर जांच न होने से इलाज में भी देरी होती है।
बवलिया केंद्र से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर आठ बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का गृह ग्राम स्थित है, जहां वे अभी भी निवासरत हैं। बावजूद इसके इतने वर्षों में इस स्वास्थ्य केंद्र की हालत नहीं सुधरी।यह क्षेत्र मध्यप्रदेश की छत्तीसगढ़ से सटी अंतिम सीमा पर स्थित है और 80% से अधिक आदिवासी आबादी वाला है, जिनमें 99% बवलिया क्षेत्र में बैगा जनजाति भी शामिल है। इसके बावजूद सरकारी उपेक्षा इस अस्पताल की हालत को बयान करती है।मंडला जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में कायाकल्प योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं, पर बवलिया स्वास्थ्य केंद्र को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाई हैं। एक तरफ सरकार आयुष्मान कार्ड की उपलब्धियों का ढोल पीट रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत बवलिया स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली से उजागर हो रही है।
