केरल की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी

तिरुवनंतपुरम, 27 जुलाई (वार्ता) केरल की लगभग सभी केंद्रीय, ज़िला और उप-जेलों में स्वीकृत क्षमता से ज्यादा कैदी बंद हैं। यहां की एकल कोठरियों में पांच-छह कैदी जबकि आठ-नौ कैदियों की क्षमता वाले कमरों में 25 कैदी तक रखे गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार केरल की सभी जेलों की क्षमता करीब आठ हजार कैदियों की है लेकिन इनमें दस हजार से अधिक बंदियों को रखा गया है। यानी जेलों में क्षमता से 128 प्रतिशत अधिक कैदी हैं। इससे कैदियों के सुधारात्मक बुनियादी ढांचे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

तिरुवनंतपुरम के पूजापुरा केंद्रीय कारागार की क्षमता 727 कैदियों की है पर यहां वर्तमान में लगभग 1,400 कैदी हैं। यानी इस जेल की क्षमता से लगभग दोगुनी कैदी यहां बंद हैं। इसी तरह त्रिशूर के वियूर केंद्रीय कारागार की स्वीकृत क्षमता लगभग 520 कैदियों की है लेकिन यहां लगभग 600 कैदी हैं। यह लगभग 15 प्रतिशत अधिक क्षमता को दर्शाता है। कोझिकोड जिला जेल में 195 कैदियों के लिए जगह थी पर इसमें 300 से ज़्यादा कैदी बंद हैं।

इन जेलोंं में स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय, चटाई, बर्तन और नहाने जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। इन आंकड़ों से राज्य के जेल नेटवर्क में व्याप्त संकट का पता चलता है।

एक उज्ज्वल पक्ष यह भी है कि केरल में विचाराधीन कैदियों की संख्या, भारत के औसत विचाराधीन कैदियों की तुलना में कम है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में विचाराधीन कैदियों की संख्या कुल कैदियों की 76 प्रतिशत तक हो सकती है जबकि केरल में विचाराधीन कैदियों की संख्या, कुल कैदियों का लगभग 60 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन जेल सुविधाओं पर बोझ कम करने के लिए कोट्टायम या पथनमथिट्टा में एक नई केंद्रीय कारागार के निर्माण की योजना की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने जेलों में सुरक्षा के लिए बाड़, सीसीटीवी और हर पांच साल में अनिवार्य कर्मचारी स्थानांतरण की बात कही है। इसके अलावा फरवरी 2025 में, सरकार ने जेल सुधारों की सिफ़ारिश करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया। समिति को कैदियों के पुनर्वितरण, नई जेलों के निर्माण और बुनियादी ढाँचे के आधुनिकीकरण सहित अन्य बातों का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया है।

 

 

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