जबलपुर: हाईकोर्ट में पैरामेडिकल तथा नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा संबंधित याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई की गयी। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस डी के पालीवाल की युगलपीठ ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए प्रदेश में संचालित पैरामेडिकल कॉलेज के मान्यत संबंधित आवेदन तथा निरीक्षण रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर न्यायालय में पेश करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने नर्सिंग कॉलेज की जांच जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश सीबीआई को जारी किये है। याचिका पर शुक्रवार 25 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की गयी है।
गौरतलब है कि नर्सिंग कॉलेज की मान्यता संबंधित फर्जीवाडे संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने आवेदन पेश करते हुए कहा था कि सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाये गये कॉलेज में पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे। युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये।
पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया था कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 समाप्त होने के बावजूद भी प्रदेश में संचालित 150 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेजों को मान्यता व दाखिले की अनुमति 2025 में प्रदान की गयी है। युगलपीठ ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि ऐसी नीतियां कौन बनाता है। कुछ तो गडबडी है कि मान्यता मिलने से पहले अपना कहना है कि कोर्स प्रारंभ हो गया है। इसे हम पागलपन करते है। युगलपीठ ने प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए याचिका की सुनवाई नर्सिंग कॉलेज संबंधित याचिका के साथ करने के निर्देश दिये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान सीबीआई की तरफ जवाब पेश किया गया कि प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट एक लाख से अधिक पेज की है। पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को जांच रिपोर्ट प्रदान नहीं करते है। इसके अलावा याचिकाकर्ता को निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त करना भी सुरक्षित नहीं है, उसके दुरूपयोग की संभावना है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि सीबीआई ने सेंधवा नर्सिंग कॉलेज की दो बार जांच करने के बाद उसे सूटेबल करार दिया है। उक्त कॉलेज में कार्य कर रहे फैकल्टी फर्जी है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में दस्तावेज भी पेश किये।
जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने सीबीआई से कहा है कि निरीक्षण रिपोर्ट कितने भी पेज की हो,उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जाये। युगलपीठ ने पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक बरकरार रखते हुए मान्यता संबंधित आवेदन तथा निरीक्षण रिपोर्ट 24 घंटे में न्यायालय के समक्ष पेष करने के आदेश जारी किये है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
