
इंदौर. दूसरे चरण के स्मार्ट मीटरों ने जनता की हालत खस्ता कर दी है. इससे तीन से चार गुना बिल नहीं बल्कि गरीबों को लाखो के बिल थमाए जा रहे हैं. बिना कोई सुनवाई के जबरजस्ती वसूली भी की जा रही हैं.
निम्न एवं मजदूर वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक सभी इस स्मार्ट मीटर की बिलिंग से परेशान हो चुके हैं. जहां तक खपत की बात है तो बताया जाता है कि एसी फ्रीज जैसे बड़े उपकरणों का इस्तेमाल करने पर बिल आता है. लेकिन ज़ब दूसरी तरफ ऐसे क्षेत्रों पर नजर घूमती है जहां मजदूर और निम्न वर्ग से भरा पड़ा है तो मामला अलग ही दिखाई देता है. साफ दिखाई देता है कि स्मार्ट मीटर को बनाया ही इसलिए गया है कि विद्युत विभाग ज्यादा से ज्यादा वसूली कर सकें. मालवा मिल क्षेत्र में निम्न वर्ग परिवार में किसी का 72 हज़ार का तो किसी को दो लाख रुपए का लाख का बिल थमाया गया. वहीं एक अकेली बुजुर्ग महिला जिसको स्मार्ट मीटर ने दस हज़ार रुपए का बिल थमाया है. आजाद नगर क्षेत्र कि एक महिला के घर का बिल एक महीने का 15 हजार रुपए है जबकि यह महिला मजदूर वर्ग श्रेणी में आती है. इस स्मार्ट मीटर को पूरी तरह से धोखा देने वाला मीटर बनाया गया है. दोपहर में इसकी खबत कम हो जाती है जबकि शाम को लोग अपने-अपने घर में पहुंचते हैं तो उसकी गति स्वतः बढ़ जाती है. साथ ही रीडिंग शुल्क भी अलग लगाया रहा है. इस महा घोटाले का विरोध प्रदर्शन देश प्रदेश में शुरू हो चुका है.
इनका कहना है…
बेरीजगारी, महंगाई के बाद अब शहरवासी विद्युत बिल से त्रस्त हो रहे हैं. पहले 300 रुपए बिल आता था, आज उन्हीं को 5000 रुपए का बिल थमाया जा रहा है. निजीकरण और स्मार्ट मीटर जनता को लूट रहे हैं.
– अमन कुम्हारे
साइंस डेवलप हो चुका है कि सरकार फ्री में बिजली दे सकती है. सबसे बड़ा सोलर सिस्टम हमारे प्रदेश में लगा है. हमारी सरकार दूसरे प्रदेशों को बिजली दे रही है. मिनिमम शुल्क में हमें क्यों नहीं दे सकती.
– प्रमोद नामदेव, सामाजिक कार्यकर्ता
ज्यादा बिल पर कोई भी अधिकारी सुनता नहीं है. सिर्फ वसूली कीजाती है. केंद्र, प्रदेश सरकार इन स्मार्ट मीटर को बंद करें क्योंकि मीटरों में सेटिंग करके भ्रष्टाचार किया जा रहा है.
– सोनू शर्मा, संयोजक बिजली उपभोक्ता एसोसिशन इंदौर
