गुना: जिला मुख्यालय सहित अंचलभर में गुरुवार-शुक्रवार दरम्यानी रात से जारी झमाझम बारिश का दौर शुक्रवार सुबह तक बना हुआ है। जिले में रात से ही रुक-रुककर मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिसने पूरे क्षेत्र को भिगो दिया है। सुबह 8:30 बजे तक मौसम विभाग द्वारा 75 मिमी (करीब 3 इंच) बारिश दर्ज की गई है और इसके बाद भी बारिश लगातार जारी है। कभी तेज तो कभी रिमझिम फुहारों ने पूरे शहर को हरियाली और ठंडक से भर दिया है।
शहरवासियों ने सुबह उठते ही बारिश की झमाझम बूंदों के साथ सावन का स्वागत किया। इधर खेतों में पानी भर जाने से किसानों को चिंता में डूबा दिया। वहीं मुख्य बाजारों, सडक़ किनारे और मोहल्लों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। झागर नदी सहित जिलेभर के नदी-नाले पूरी तरह ऊफान पर हैं। म्याना सहित जिलेभर के रेलवे अंडरब्रिजों में पानी भरने के कारण लोगों को पानी भारी परेशानी हुई।
वहीं शहर में जलभराव वाले इलाकों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है ताकि कहीं भी आमजन को परेशानी न हो। वहीं, नदी-नालों में पानी की आवक बढऩे से निचली बस्तियों में परेशानी हुई। बारिश का यह दौर फिलहाल जारी रहने के आसार हैं। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटे में और भी भारी बारिश की संभावना जताई है। शहरवासियों को अब गर्मी और उमस से राहत मिली है।
कलेक्टर कन्याल का आदेश: बारिश के दौरान नदी, नहर, जलप्रपातों से बचें, अन्यथा होगी धारा 163 के तहत कार्रवाई इधर जिले में लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट किशोर कुमार कन्याल ने जनसुरक्षा की दृष्टि से एक अहम प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत लागू किया गया है, जिसके तहत गुना जिले की सीमा में आने वाले सभी नदी, नहर, तालाब, जलाशय, जलप्रपात एवं अन्य जल भराव वाले स्थलों में आमजन के प्रवेश को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
यह निर्णय आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत जिले में संभावित जल आपदा की आशंका को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जारी आदेश में उल्लेख किया गया है कि पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण जिले के समस्त जल स्त्रोतों में जल स्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है। साथ ही मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। पूर्व वर्षों के अनुभव के आधार पर देखा गया है कि वर्षा ऋतु के दौरान कई बार फिसलन और जलप्रवाह के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ी है और अप्रिय घटनाएं घट चुकी हैं।
इस बार किसी भी प्रकार की जनहानि को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आमजन पर लागू होगा, लेकिन आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी इससे मुक्त रहेंगे। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धाराओं 51 से 60 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 16 जुलाई 2025 से प्रभावी कर दिया गया है और वर्षा ऋतु की समाप्ति तक लागू रहेगा, जब तक कि इसे पूर्व में वापस न ले लिया जाए। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल स्रोतों से दूर रहें और अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
