सीधी: जिले की गर्भवती महिलाओं द्वारा गांव की जर्जर सड़कों को लेकर उठाई गई आवाज़ ने सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में 9 माह की गर्भवती लीला साहू ने सड़क की खराब हालत के कारण प्रसव जैसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने की मुश्किलें साझा कीं। लेकिन उनकी इस मांग के जवाब में पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह और सांसद राजेश मिश्रा के बयानों ने न सिर्फ हैरानी, बल्कि नाराजगी भी पैदा कर दी है। यह मामला अब सिर्फ सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति सांसद और मंत्रियों के बर्ताव कैसा रहे इससे जुड़ गया है ।
दरअसल सीधी जिले में खराब सड़कों की समस्या को लेकर 9 माह की गर्भवती लीला साहू और अन्य सात गर्भवती महिलाओं ने सोशल मीडिया के ज़रिए आवाज़ उठाई, लेकिन इसके जवाब में नेताओं के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। लीला साहू, जो एक बघेली यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, ने कीचड़ और गड्ढों से भरी सड़क की स्थिति दिखाते हुए वीडियो साझा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से पक्की सड़क की मांग की। इस पर मध्यप्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा, “सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने से क्या हम तुरंत डंपर और प्लांट लेकर पहुंच जाएंगे?” उन्होंने बताया कि सड़कों का निर्माण एक तय प्रक्रिया के तहत होता है और हर डिमांड पर तुरंत कार्रवाई संभव नहीं।
वहीं, भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने लीला को सलाह दी, “हर डिलीवरी की एक्सपेक्टेड डेट होती है, उसे ध्यान में रखकर पहले ही अस्पताल में भर्ती हो जाएं। सरकार सारी सुविधाएं देगी।” उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल होने की कोशिश का भी इशारा किया। लीला पिछले एक साल से पक्की सड़क की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि खराब सड़कों के कारण प्रसव के समय गांव से अस्पताल ले जाना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। यह मुद्दा अब न केवल बुनियादी सुविधा की मांग बन गया है, बल्कि सत्ता और संवेदनशीलता के बीच के फासले को भी उजागर कर रहा है।
