जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में तल्ख टिप्पणी करते हएु कहा है कि राज्य की प्रशासनिक भूलों की कीमत सेवानिवृत्त कर्मी से नहीं वसूल सकते। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा है कि प्रशासनिक त्रुटिवश प्रदत्त धनराशि की वसूली सेवानिवृत्ति पश्चात न्यायसंगत नहीं है। इसी के साथ एकलपीठ ने पेंशनभोगी से वसूली का आदेश निरस्त कर दिया।
यह मामला जबलपुर निवासी रिटायर्ड एसआई सीएम शुक्ला की ओर से दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, विनीत टेहेनगुरिया व शुभम पाटकर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को सेवानिवृत्ति के उपरांत वसूली नोटिस थमाया गया। इसके अंतर्गत दो लाख 12 हजार 854 रुपये की वसूली निकाल दी गई।
राज्य का तर्क यह था कि यह राशि द्वितीय समयब वित्तीय उन्नयन (एसीपी) के रूप में एक अप्रैल 2006 से त्रुटिवश प्रदान की गई थी। इसके जवाब में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह भुगतान प्रशासनिक भूल थी, जिसमें उसकी की ओर से न कोई छल था, न ही कोई मिथ्या विवरण दिया गया था और न ही उक्त लाभ देने के पूर्व इस आशय का कोई प्रतिज्ञापत्र निष्पादित किया गया था कि गलत भुगतान पर लाभ वापिस किए जाएंगे। हाईकोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद याचिकाकर्ता के हक में उक्त आदेश पारित किया।
