
जबलपुर। जिले के गांधीग्राम बुढ़ागर में स्थित सबसे बड़े तालाब का अस्तित्व खतरें में होने का दावा करते हुए मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर मामले में आरोप है कि माइनिंग और अतिक्रमण के कारण तालाब अपना अस्तित्व खो चुका है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में सिहोरा एसडीएम को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की है।
यह जनहित का मामला गांधीग्राम बुढ़ागर निवासी रज्जन बर्मन की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता राजमणि मिश्रा ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि गांधीग्राम बुढ़ागर में जिले का सबसे बड़ा तालाब है, जिसका क्षेत्रफल करीब पांच सौ एकड़ का है। आरोप है कि उक्त तालाब के चारों ओर अतिक्रमणकारियों ने मलबा डालकर उस पर ठेले-टपरे जमा लिये है, इतना ही नहीं तालाब को भरने वाले कैचमेंट एरिया पर लगातार हो रहीं माइनिंग से तालाब पूरी तरह से अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। तालाब में पानी न आने से उस पर अतिक्रमणकारी कब्जा करते जा रहे है। मामले में राहत चाही गई कि माइनिंग पर रोक लगाते हुए अतिक्रमणकारियों को तत्काल हटाने के निर्देश दिये जाये। याचिका में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, जबलपुर कलेक्टर, एसडीओ व तहसीलदार सिहोरा को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश देते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
