पाकिस्तान के भविष्य पर गहरा संकट: Microsoft ने 25 साल बाद समेटा पूरा कामकाज, आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल बनी बड़ी वजह!

दिग्गज टेक कंपनी का पाकिस्तान से बाहर निकलना देश के बिगड़ते कारोबारी माहौल का संकेत; संस्थापक प्रमुख ने बताया ‘एक युग का अंत’, पूर्व राष्ट्रपति ने ‘गुम हुए अवसर’ पर जताई चिंता।

इस्लामाबाद, 5 जुलाई (नवभारत): पाकिस्तान के भविष्य पर एक बड़ा संकट गहराता दिख रहा है। दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने 25 साल बाद पाकिस्तान से अपना पूरा कामकाज समेट लिया है। इस कदम को पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता, लगातार बदलती राजनीतिक परिस्थितियाँ और बिगड़ते कारोबारी माहौल का सीधा परिणाम माना जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट पाकिस्तान के संस्थापक प्रमुख जव्वाद रहमान ने लिंक्डइन पर इस खबर की पुष्टि करते हुए इसे “एक युग का अंत” और देश द्वारा बनाए गए अस्थिर वातावरण का “गंभीर संकेत” बताया है।

माइक्रोसॉफ्ट ने जून 2000 में पाकिस्तान में अपने ऑपरेशंस शुरू किए थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से कंपनी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी कम कर रही थी। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने औपचारिक रूप से कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कंपनी के आखिरी बचे कर्मचारियों को सूचित कर दिया गया है कि ऑपरेशंस पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब पाकिस्तान में केवल एक संपर्क कार्यालय बचा है जिसमें लगभग पांच कर्मचारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट का यह फैसला पाकिस्तान की अस्थिर अर्थव्यवस्था, बार-बार सरकार में बदलाव, उच्च कर और टेक्नोलॉजी के आयात में आने वाली कठिनाइयों से जुड़ा है। वित्तीय वर्ष 2024 में पाकिस्तान का व्यापार घाटा 24.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, और जून 2025 तक विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर मात्र 11.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जिससे विदेशी कंपनियों के लिए वहां कारोबार करना मुश्किल हो गया है।

पूर्व राष्ट्रपति ने बताया ‘गुमा हुआ अवसर’, भारत से व्यापार संबंध भी बने कारण

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने भी माइक्रोसॉफ्ट के इस कदम पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे देश के आर्थिक भविष्य के लिए “परेशान करने वाला संकेत” बताया है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में फरवरी 2022 की घटना का जिक्र किया जब बिल गेट्स ने उनसे मुलाकात की थी।

अल्वी ने बताया कि उस समय माइक्रोसॉफ्ट पाकिस्तान में विस्तार पर विचार कर रहा था, और पीएम इमरान खान की माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला से फोन पर बात भी तय हुई थी। लेकिन, राजनीतिक उथल-पुथल और ‘सत्ता परिवर्तन’ के कारण वे योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गईं, जिसके बाद अक्टूबर 2022 तक माइक्रोसॉफ्ट ने पाकिस्तान के बजाय वियतनाम को अपनी विस्तार योजना के लिए चुना। भारत के साथ व्यापार संबंधों में गिरावट भी पाकिस्तान के निवेश माहौल को खराब करने में एक कारक रही है। 2018 में 3 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में घटकर 1.2 बिलियन डॉलर रह गया है, जिससे आवश्यक आयातों में देरी और लागत बढ़ी है। माइक्रोसॉफ्ट का यह निर्णय पाकिस्तान के तकनीकी क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है और यह देश के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को उजागर करता है।

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