
गुना। जिला न्यायालय परिसर को शिफ्ट किए जाने की सुगबुगाहट ने गुना के वकीलों और प्रशासन के बीच तकरार की चिंगारी को हवा दे दी। बुधवार को हुए चक्काजाम और विवादित प्रदर्शन के बाद गुरुवार को पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया, जब कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल स्वयं जिला न्यायालय पहुंचे और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र व अन्य न्यायाधीशों की उपस्थिति में वकीलों के साथ संवाद स्थापित किया। कलेक्टर ने बीते दिन की घटनाओं पर अफसोस जाहिर करते हुए स्पष्ट कहा कि प्रशासन की मंशा केवल जिले के विकास की है, न कि टकराव की। उन्होंने कहा कि हमें गुना को गुनाहों से नहीं, बल्कि उपलब्धियों से पहचान दिलानी है। अगर कहीं प्रशासनिक समन्वय में चूक हुई है तो वह सुधारी जाएगी, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे पूरे जिले की छवि पर आंच आए।
दरअसल बुधवार को न्यायालय परिसर के स्थानांतरण के विरोध में वकीलों ने हनुमान चौराहे पर करीब ढाई घंटे का चक्काजाम किया था। ज्ञापन देने पहुंचे वकील कलेक्टर की अनुपस्थिति से आक्रोशित हो उठे और एक पालतू डॉग के गले में कलेक्टर गुना लिखी नेमप्लेट टांगकर उसे ही प्रतीकात्मक रूप से ज्ञापन सौंप दिया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई और मामला सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक की जानकारी में पहुंच गया।
कलेक्टर ने अपने बयान में कहा कि बुधवार को वे कलेक्ट्रेट पहुंच चुके थे और ज्ञापन लेने के लिए एडीएम, एसडीएम जैसे अधिकारी वहां मौजूद थे। लेकिन जब वकीलों की यह विशेष मांग आई कि वे केवल कलेक्टर को ही ज्ञापन देना चाहते हैं, तब समय निर्धारित किया गया। उन्होंने कहा, विरोध का तरीका इतना उग्र न हो कि वह विकास की जगह विनाश का संदेश देने लगे। उन्होंने वकीलों से अपेक्षा जताई कि भविष्य में प्रशासन और अभिभाषक समाज आपसी तालमेल से जिले के हित में कार्य करेंगे।
इस मुलाकात के दौरान वकीलों ने भी अपनी बात रखी और कलेक्टर को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। जिला प्रशासन और वकीलों के बीच हुआ यह संवाद भविष्य में प्रशासनिक कार्यों को सुचारू और सहयोगात्मक दिशा में ले जाने की संभावना की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि हनुमान चौराहा स्थित जिला न्यायालय को शहर से बाहर जगनपुर में स्थानांतरित करने की तैयारी प्रशासन द्वारा की जा रही है। इस फैसले का वकीलों ने विरोध किया है। वकीलों का तर्क है कि कोर्ट की वर्तमान स्थिति आम नागरिकों की पहुंच के लिहाज से सर्वसुलभ है और शिफ्ट होने से न्यायिक प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
