
ग्वालियर। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सरकारी सिस्टम में गहरी पैठ बनाए बैठे एक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। एक आरटीआई एक्टिविस्ट की शिकायत पर की गई जांच में सामने आया है कि 25 शासकीय सेवक फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। एसटीएफ ने इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।
आरटीआई एक्टिविस्ट गोरीशंकर राजपूत से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर इस पूरे रैकेट की जांच शुरू हुई थी। शिकायत के मुताबिक, एक संगठित गिरोह के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर इनका उपयोग विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी पाने के लिए किया गया।
विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ मध्यप्रदेश पंकज कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक एसटीएफ ग्वालियर राजेश सिंह भदौरिया के निर्देशन में एसटीएफ के डीएसपी संजीव कुमार तिवारी के नेतृत्व में गठित 11 सदस्यीय टीम ने जब इस सूचना की गहराई से जांच की, तो 25 नाम सामने आए। इन सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है, लेकिन एसटीएफ की प्राथमिक जांच में फर्जीवाड़ा साबित हो चुका है। तिवारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द कर पूरा रैकेट सामने लाया जाएगा।
जांच में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, जनजाति कार्य विभाग, पुलिस विभाग, पीडब्ल्यूडी/पीएचई आदि विभागों में फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। एसटीएफ ने इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है।
एसटीएफ ने सिर्फ फर्जी उम्मीदवारों पर ही नहीं, बल्कि फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले अफसरों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इन्हें भी नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
इस मामले में डीएसपी एसटीएफ संजीव कुमार तिवारी ने बताया कि अपराध दर्ज कर लिया है और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। संबंधित जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों को भी नोटिस भेजे जा चुके हैं। फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं और जिन भी लोगों की सहभागिता सामने आएगी उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
