वाशिंगटन/नई दिल्ली, 02 जुलाई (वार्ता) क्वाड देशों-भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है और इस घटना में शामिल आतंकवादियों और उन्हें आर्थिक तौर पर मदद करने वाले संगठनों एवं उनसे जुड़े लोगों को तत्काल के न्याय के दायरे में लाने का आह्वान किया।
वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के ताकेशी इवाया ने कहा “हम 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई,जबकि कई अन्य घायल हो गए। हम पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और सभी घायलों के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की हार्दिक कामना करते हैं। हम इस निंदनीय घटना मेंं शामिल आतंकवादियों और उन्हें आर्थिक तौर पर मदद करने वाले संगठनों एंव उनसे जुड़े लोगों को तत्काल न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान करते हैं। हम संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों के अनुसार इस मामले में सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह करते हैं।”
संयुक्त वक्तव्य में चारों देशों की स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई। उन्होंने चार प्रमुख क्षेत्रों-समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकी, और मानवीय सहायता एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया पर केंद्रित एक नए,महत्वाकांक्षी और मजबूत एजेंडे की भी घोषणा की। इस बैठक में क्वाड देशों ने ‘क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव’ के शुभारंभ की भी घोषणा की, जो “महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में सहयोग कर आर्थिक सुरक्षा और सामूहिक लचीलेपन को मजबूत करने के लिए हमारी साझेदारी का एक महत्वाकांक्षी विस्तार है”।
वक्त्व्य में कहा गया है, “हम कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। भारत- प्रशांत क्षेत्र में चार प्रमुख समुद्री राष्ट्रों के रूप में, हमारा यह मानना है कि समुद्री क्षेत्र में शांति और स्थिरता क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि का आधार है। हम एक ऐसे क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ सभी देश दबाव से मुक्त हों।” क्वाड विदेश मंत्रियों ने भारत- प्रशांत क्षेत्र में अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की और क्षेत्रीय भागीदारों केसाथ कार्य करते हुए शांति, सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ाने के लिए क्वाड संगठन की ताकत और संसाधनों का और अधिक दोहन करने के तरीके पर चर्चा की।
क्वाड राष्ट्रों ने चीन और समुद्र में उसकी आधिपत्यवादी गतिविधियों के संदर्भ में “पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति के बारे में” गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा “हम किसी भी एकतरफा कार्रवाई के प्रति अपने कड़ा विरोध व्यक्त करते हैं जो ताकत या दबाव से यथास्थिति को बदलने की कोशिश करते हैं। हम खतरनाक और भड़काऊ गतिविधियों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। ऐसी गतिविधियों में अपतटीय संसाधन विकास में हस्तक्षेप, नेविगेशन और ओवरफ्लाइट में बार-बार बाधा डालना, सैन्य विमानों और तट रक्षक और समुद्री जहाजों द्वारा खतरनाक युद्धाभ्यास करना शामिल है। ये कार्रवाइयां क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं।
उन्होंने “विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रमुख आपूर्ति श्रृंखलाओं की अचानक कमी और भविष्य की विश्वसनीयता” के बारे में भी गहरी चिंता व्यक्त की। इसमें महत्वपूर्ण खनिजों, कुछ उत्पादों और खनिज प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के लिए गैर-बाजार नीतियों और प्रथाओं का उपयोग शामिल है। उन्होंने चीन के एक अप्रत्यक्ष संदर्भ में कहा, “महत्वपूर्ण खनिजों और उनसे वस्तुओं, प्रसंस्करण और शोधन के लिए किसी एक देश पर निर्भरता हमारे उद्योगों को आर्थिक दबाव, मूल्य हेरफेर और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के लिए उजागर करती है, जो हमारी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को और नुकसान पहुंचाती है।”
उन्होंने उत्तर कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा “हम उत्तर कोरिया की दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी की चोरी और उत्तर कोरिया के सामूहिक विनाश के अवैध हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने के लिए विदेशों में श्रमिकों का उपयोग शामिल है।”
संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है “ हम उन देशों के बारे में गहरी चिंता व्यक्त करते हैं जो उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियां प्रत्यक्ष रूप से वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को कमजोर करती
है। क्वाड ने म्यांमार संकट पर भी गहरी चिंता व्यक्त की और सरकार से युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का पालन करते हुए सभी पक्षों से युद्धविराम लागू करने का आह्वान किया। क्वाड स्पष्ट रूप से सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी कृत्यों की निंदा करता है, और आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दोहराता है। ”
उन्होंने इस वर्ष मुंबई में क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर पार्टनरशिप शुरू करने की योजना की भी घोषणा करते हुए कहा “हम क्षेत्रीय आपदाओं के लिए तुरंत राहत एवं बचाव प्रतिक्रियाओं में समन्वय जारी रखते हैं और मार्च 2025 में मध्य म्यांमार में आए भूकंप से प्रभावित समुदायों की मदद के लिए सामूहिक रूप से 3 करोड़ अमरीकी डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता दी है। हम चारों लोकतंत्रिक देश एक स्वतंत्र और खुले भारत -प्रशांत क्षेत्र के समर्थन में अपने सहयोग को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हमारे सहयोग का 21वीं सदी में इस क्षेत्र की शीर्ष चुनौतियों और अवसरों पर स्थायी प्रभाव पड़े। हम इस वर्ष के अंत में भारत द्वारा आयोजित अगले क्वाड लीडर्स समिट और 2026 में ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित अगली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”
