जबलपुर: हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को दी गई उम्रकैद को 4 वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी ने यौन शोषण किया है, लेकिन दुष्कर्म नहीं किया। जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में भी पीडि़ता को किसी तरह की अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं है। इसलिए पॉक्सो की धारा 3 नहीं वरन धारा 7 के तहत दोषी करार देकर 4 वर्ष की सजा उचित है।
सिंगरौली निवासी विन्द्रोस राव की ओर से अधिवक्ता महेश प्रसाद शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अदालत ने आरोपी को 11 सितंबर 2023 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जोकि अनुचित है। उन्होंने दलील दी कि केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर सजा दी गई। मेडिकल जांच में पीडि़ता के शरीर में कहीं भी अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं पाई गई है। पीडि़ती की नानी ने भी अपने बयान में कहा कि उसने पुलिस के दबाव में आकर आरोप लगाया है।
