गांधीनगर, (वार्ता) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर (आईआईटी गांधीनगर) के 14वें दीक्षांत समारोह में अदित अतुल राम्भिया ने संस्थान के दो सर्वोच्च सम्मान निदेशक स्वर्ण पदक और खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशस्ति पत्र प्राप्त किए हैं ।
आईआईटी गांधीनगर की ओर से शनिवार को जारी बयान में अपने शैक्षणिक सफर को याद करते हुए श्री अदित ने कहा, “ऊत्तकों के पुनर्जनन हेतु जैवपदार्थ (बायोमैटेरियल्स फॉर टिशू रीजेनेरेशन) जैसे कोर्स और डॉ. श्रीहरिता रोथु व डॉ. अभिजीत मिश्रा जैसे प्रोफेसरों के साथ शोध ने मेरे दृष्टिकोण को पूरी तरह से बदल दिया। मुझे यह पता चला कि पदार्थ, स्वास्थ्य सेवा, घाव भरने और जल शुद्धिकरण आदि के माध्यम से किस प्रकार हमारे वास्तविक जीवन को प्रभावित करते हैं।”
अदित का ज्ञानार्जन भारत तक ही सीमित नहीं रहा। अमेरिका के टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी में महत्वपूर्ण शोध इंटर्नशिप के दौरान उन्हें सॉफ्ट रोबोटिक्स और मेडिकल डिवाइसेज के क्षेत्र में अत्याधुनिक कार्य देखने का अवसर मिला। इस अनुभव ने वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण प्रक्रियाओं की उनकी समझ को और भी विस्तृत किया एवं जैव-आयुर्विज्ञान अभियांत्रिकी में अधिस्नातक करने के उनके निर्णय को और भी मजबूत किया। वह जल्द ही कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी, पिट्सबर्ग में अपनी शैक्षिक यात्रा जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
अदित की कहानी उसके गहन समर्पण के साथ शैक्षणिक अध्यवसाय तथा खेल और छात्र नेतृत्व के बीच संतुलन रखने की उनकी योग्यता के लिए उल्लेखनीय है। एक प्रतिस्पर्धी तैराक के रूप में उन्होंने कई अंतर-आईआईटी जलक्रीड़ा प्रतिस्पर्धा (एक्वाटिक्स मीट्स) में आईआईटी गांधीनगर का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किया। वे कहते हैं, “आईआईटी गांधीनगर समुदाय का सहयोग अमूल्य था। हर जीत से पहचान, पुरस्कार और बेहतर उपकरण की सुलभता प्राप्त हुई , जिससे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।”
व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर, अदित ने खेल सचिव के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और संस्थान का पहला जनरल चैंपियनशिप एक कैंपस-व्यापी खेल आयोजन सफलतापूर्वक आयोजित किया, जिससे आईआईटी गांधीनगर की खेल संस्कृति को नई दिशा मिली। अनेक विभिन्न जिम्मेदारियों के बीच संतुलन के लिए प्राथमिकताओं का सावधानी से निर्धारण आवश्यक है ।
अदित बताते हैं, “इंटर-आईआईटी मीट्स के दौरान तैराकी और पढ़ाई प्राथमिकता थी। आयोजनों के समय, मैं पूरी तरह उस भूमिका पर केंद्रित रहता था। यह किसी निश्चित समय में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ के प्रति पूरी तरह समर्पित होने की बात है।”दिलचस्प बात यह है कि जेईई की तैयारी और कोविड-19 महामारी के दौरान आदित को प्रतिस्पर्धी तैराकी से कुछ समय के लिए दूर रहना पड़ा, लेकिन अनियमित अभ्यास के माध्यम से उन्होंने खेलों से जुड़ाव बनाए रखा, जिससे उन्हें खुद को एकाग्रचित्त रखने में मदद मिली। आईआईटी गांधीनगर लौटने के बाद उनकी प्रतिस्पर्धी भावना फिर से जागृत हो गई।”
वह स्वीकार करते हैं कि शुरुआत में उन्हें नए आईआईटी में शामिल होने को लेकर संकोच था लेकिन उनका अनुभव आशातीत रहा। वह कहते हैं,“मुझे लगा था कि शायद यहां पुरानी आईआईटी की तरह अवसर नहीं होंगे। लेकिन अब पीछे मुड़कर देखता हूं तो महसूस करता हूं कि आईआईटी गांधीनगर ने मुझे सब कुछ दिया शैक्षणिक, शोध, खेल, नेतृत्व और कक्षा से बाहर का अनुभव। मैंने विविध अभिरुचियों की तलाश की और अपने भविष्य के बारे में सोच-समझकर निर्णय लिए।”
अपने चार वर्षों को याद करते हुए आदित किसी एक निर्णायक क्षण को चुनना कठिन मानते हैं, हालांकि इंटर-आईआईटी प्रतिस्पर्धा में जीता गया उनका पहला गोल्ड मेडल और उसके बाद का जश्न उनके दिल के बेहद करीब है। भविष्य के छात्रों के लिए उनका संदेश सरल और गहन है। उसने कहा,“जो आपके पास है और जहां आप हैं, उसी के साथ सर्वश्रेष्ठ करें। आप सब कुछ नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन जो आपके सामने है, उसका अधिकतम लाभ जरूर उठा सकते हैं।”
कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी, पिट्सबर्ग और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स से अधिस्नातक के प्रस्तावों पर विचार करते हुए, अदित अपने अगले अध्याय की तैयारी कर रहे हैं। वह अपने पीछे शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध नवाचार, खेल भावना और नेतृत्व की ऐसी विरासत छोड़ रहे हैं, जो 21वीं सदी के अभियंताओं के लिए आदर्श है।
मुंबई के मूल निवासी अदित का पालन-पोषण एक ऐसे परिवार में हुआ जो विज्ञान और सेवा गहन रूप से जुड़ा हुआ है। उनकी माँ एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और पिता एक बहुलक अभियंता (पॉलिमर इंजीनियर)।
