
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) का फैसला आने तक रेलवे एक पद खाली रखेगा। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस डीके पालीवाल की युगलपीठ ने पश्चिम मध्य रेलवे की आपत्ति खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को पूर्व में दिये गये अंतरिम संरक्षण को जारी रखा है। इसके साथ ही न्यायालय ने कैट को निर्देशित किया है वह तीन माह के भीतर मामले में अंतिम निर्णय ले।
दरअसल कोटा निवासी बृजमोहन रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा में शामिल हुआ था। इसमें योग्यता दसवीं कक्षा या आई टी आई करना आवश्यक था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निखिल भट्ट ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता ने 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और आईटीआई कर रहा था। रेलवे की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार भी उत्तीर्ण कर लिया था। जब रेलवे ने कागजातों की जांच की तो पाया कि वो अभी आईटीआई कर रहा है, इस आधार पर उसकी नियुक्ति रद्द कर दी। आवेदक की ओर से दलील दी कि आवेदन पत्र में त्रुटि ऐसी थी, जिसका पात्रता मापदंडों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। पूर्व में हाईकोर्ट ने आवेदक को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था। पश्चिम मध्य रेलवे ने इसके खिलाफ आपत्ति पेश की थी। मामले में आगे हुई सुनवाई पर न्यायालय ने पमरे की आपत्ति निरस्त करते हुए उक्त निर्देश दिये।
