जनता पार्टी की टूट से शुरू हुई BJP की नई यात्रा, उस दौर में बिखरने का आज भी दर्द

इंदौर।देश भर में 25 जून का दिन बीजेपी आपातकाल को काले अध्याय के रूप में मना रही है। 24 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई थी, जिसे 21 मार्च 1977 में आधिकारिक रूप से समाप्त किया गया था। आपातकाल 21 महीने चला था। इसे इतिहास का सबसे काला दौर माना जाता है, आपातकाल के तुरंत बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी को हार मिली थी। 1980 में उन्होंने पूरी सत्ता के साथ वापसी की थी। उस दौरान आपसी मतभेदों के कारण जनता पार्टी के बिखर जाने का दर्द आज भी भाजपा नेताओं के बीच है। यह बात बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आज प्रेसवार्ता में कही।

आज सुधांशु त्रिवेदी ने इमरजेंसी को लेकर शाम को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप संबोधित करेंगे। उन्होंने आपातकाल के बाद जनता पार्टी के बिखरने का दर्द साझा किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि “उस समय जनता पार्टी में आपसी मतभेद और अहम का भाव बढ़ गया था। इस पर दुखी होकर अटलजी ने एक पंक्ति लिखी थी। अटलजी की पंक्ति से पता चलता है कि क्यों जनता पार्टी टूट गई? उन्होंने लिखा था ‘लगी कुछ ऐसी नजर, बिखरा शीशे का शहर, अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं, गीत नहीं गाता हूं…’।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि इस टूट के बाद से भाजपा की नई यात्रा प्रारंभ हुई। हम 1980 में बने और उसके बाद बीजेपी एकमात्र राजनीतिक दल है, जिसने अपना कद भारत की राजनीति में कांग्रेस से बड़ा करके दिखाया है। शायद कांग्रेस ने सोचा होगा कि हमने जनता पार्टी को तुड़वा दिया, लेकिन वहीं से भारतीय जनता पार्टी के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त हो सका।

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