भोपाल। श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम द्वारा आयोजित भावना योग कार्यक्रम में मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी के उद्बोधन ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज शरीर नहीं, आत्मा को स्पर्श करने वाले योग की आवश्यकता है। भावना योग तन, मन और आत्मा को जोड़कर जीवन में संयम, समर्पण और संतुलन लाता है। कार्यक्रम में ऊर्जा आह्वान, संकल्प ध्यान, आत्मस्वीकृति और प्रार्थना साधना कराई गई। सभी ने सामूहिक मंगल भावना का गायन किया। योगाचार्य, साधक, संत, विद्यार्थी व वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी से कार्यक्रम आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भावना योग: मन और आत्मा के जुड़ने से जीवन में आता है संयम और समर्पण का संतुलन
