लगातार बढ़ रहा क्षेत्रीय तनाव और अविश्वास; विशेषज्ञ बोले- दोनों पक्षों की गहरी जड़ें जमाईं रणनीतियाँ और वैश्विक शक्तियों के निहित स्वार्थ बन रहे बड़ी बाधा।
नई दिल्ली, 21 जून (नवभारत): मध्य पूर्व में इजराइल और ईरान के बीच गहराता संघर्ष एक चिंता का विषय बना हुआ है, और पश्चिमी देशों के इसे समाप्त करने या कम करने के प्रयास लगातार विफल होते दिख रहे हैं। शुक्रवार, 21 जून, 2025 को भी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है, और ऐसा लगता है कि इस नए युद्ध का कोई तात्कालिक अंत नहीं है। पश्चिमी देश, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के सदस्य, लगातार कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं, बैठकों का आयोजन कर रहे हैं और मध्यस्थता के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें अब तक ठोस परिणाम देने में नाकाम रही हैं।
इस विफलता के पीछे कई जटिल कारण हैं। सबसे पहले, इजराइल और ईरान दोनों के अपने-अपने सुरक्षा और रणनीतिक हित हैं जो गहरे ऐतिहासिक और वैचारिक मतभेदों से जुड़े हैं। ईरान अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाना चाहता है और इजराइल की सुरक्षा को सीधे चुनौती देता है, जबकि इजराइल अपनी सीमाओं की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए दृढ़ है। इन दोनों देशों की गहरी जड़ें जमाईं रणनीतियाँ और एक-दूसरे के प्रति अविश्वास इतना गहरा है कि कोई भी पक्ष आसानी से पीछे हटने को तैयार नहीं है। दूसरे, पश्चिमी देशों के प्रयास अक्सर अपनी भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं से प्रभावित होते हैं, जिससे दोनों पक्षों में से कोई एक या दोनों ही उन प्रयासों पर पूर्ण विश्वास नहीं कर पाते हैं। विभिन्न पश्चिमी शक्तियों के अपने-अपने निहित स्वार्थ हैं, चाहे वह तेल और गैस तक पहुंच हो, क्षेत्रीय गठबंधन बनाए रखना हो या हथियारों की बिक्री हो, जो उनके मध्यस्थता प्रयासों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। यह जटिल वेब सुलह के किसी भी प्रयास को और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है।

