जबलपुर। हैदराबाद से लाए गए घोड़ों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया है कि जीवित घोड़े की मेडिकल रिपोर्ट और इलाज से जुड़ी जानकारी का हलफनामा पेश करें। याचिकाकर्ता सिमरन इस्सर ने बताया कि हैदराबाद निवासी सुरेश पाल गुडू ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए घोड़ों का इस्तेमाल किया और जब जांच शुरू हुई तो साक्ष्य छुपाने के लिए करीब 57 घोड़ों को जबलपुर लाया गया। इनमें से 18 की मौत हो चुकी है, जिनमें से छह की रास्ते में ही मृत्यु हो गई थी।
याचिका में आरोप है कि घोड़ों को पर्याप्त भोजन, देखभाल और इलाज नहीं मिल रहा, जिससे उनकी मौत हो रही है। केयरटेकर सचिन तिवारी की ओर से कहा गया कि मृत घोड़े वृद्ध थे और उन्हें प्रजनन के लिए लाया गया था, जिस पर अदालत ने आश्चर्य जताया। कोर्ट ने केयरटेकर से घोड़ों की संख्या, उद्देश्य और देखभाल की स्थिति की जानकारी हलफनामे में देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 25 जून को होगी।
