जबलपुर:संस्कारधानी के ह्रदयस्थल कहे जाने वाले कमानिया गेट का समय आखिर कार बदल ही गया। अब नई घड़ी लग ही गई है। यहां लोग समय देख सकते हैं, ऐतिहासिक धरोहर की शोभा एक बार फिर बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि विगत कई साल से यहां लगी घड़ी बंद पड़ी थी, जो कि पूरी तरह से खोखली भी हो गई थी। जिसके बीच में से दूसरी तरफ देखा जा सकता था, लेकिन अब समय बदल चुका है और कमानिया को एक नई घड़ी मिल गई है।
एक तरफ की बदली घड़ी
उल्लेखनीय है कि कमानिया गेट के दोनों तरफ घड़ी लगी हुई है, लेकिन अभी सिर्फ फुहारा तरफ की घड़ी जो कि पूरी तरह से खोखली हो गई थी, सिर्फ उसको ही बदला गया है। जबकि सराफा तरफ की घड़ी अभी भी बंद पड़ी हुई है।
1939 में बनाया गया था
स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दौरान जबलपुर शहर ने एक प्रमुख भूमिका निभाई थी। एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना 1939 में त्रिपुरी कांग्रेस के आयोजन में हुई थी। नेताजी सुभाष चंद्रबोस ने 1939 में त्रिपुरी कांग्रेस के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के लिए चुनाव जीता था। जबलपुर में उसकी याद में कमानिया गेट बनाया गया था। जिसके चलते इसका नाम भी त्रिपुरी कांग्रेस स्मारक रखा गया है और कांग्रेस का इससे नाता भी रहा है।
जबलपुर की ऐतिहासिक धरोहर
कमानिया गेट बाजार उस समय शहर की जीवन रेखा थी। आज एक विशाल आभूषण बाजार भी कमानिया गेट के पास बना हुआ है। कमानिया गेट सिर्फ एक गेट नहीं है, यह जबलपुर शहर की ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसकी नींव में तमाम बातें जड़ी और जुड़ी हैं। इसकी भव्य बनावट गर्व का अहसास कराती है। इसके बाद भी इसकी हालत इस कदर बदहाल हो गई है।
