
जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस देव नारायण मिश्रा की युगलपीठ ने सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पाया कि मामा सहित तीन व्यक्तियों को फंसाने के लिए उनके नाम एफ आई आर में दर्ज करवाये गये थे। अचानक झगडा में निजी बचाव के कारण हत्या की घटना घटित हुई। युगलपीठ ने चार आरोपी के आजीवन कारावास की सजा को सात साल में तब्दील करने के आदेश जारी किये।
अपीलकर्ता दिनेश सिंह सहित सात आरोपियों ने हत्या के अपराध में बरेली जिला रायसेन द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में कहा गया था कि मृतक मदन लाल उसका सगा ताउ था। पारिवारिक बंटवारे के बाद भी ताउ और उनका बेटा होशियार सिंह उसकी हिस्से में आई जमीन पर कब्जा करने के लिए आये थे। इस दौरान अचानक मारपीट की घटना घटित हो गयी और लाठी व डंडों से मारपीट होने के कारण ताऊ की मौत हो गयी तथा उसके बेटे को चोटे आई थी। घटना में दिनेश को भी चोटें आई थी।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि मृतक तथा उसका बेटा जमीन पर कब्जा करने आये थे। विवाद के दौरान निजी बचाव में मारपीट की घटना घटित हुई। पूर्व में मॉ ने मृतक के खिलाफ जमीन हड़पने की एफआईआर दर्ज करवाई थी। ताऊ अपने हिस्से में आई जमीन पहले बेच चुका था। इसके अलावा अपीलकर्ता के हिस्से में पारिवारिक सम्पत्ति के आये ट्रैक्टर भी स्वयं रख लिया था।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि देहाती रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों में मृतक के मामा भोजराज, संतोष तथा रामचरण का नाम नहीं था। मारपीट के बाद अस्पताल में मृत्यु होने पर उनका नाम जोड़ा गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद तीनों को दोषमुक्त कर दिया। इसके अलावा दिनेश सिंह,उसके बेटे थान सिंह सहित चैत सिंह व तुलसी राम की सजा को घटाकर सात साल करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ थान सिंह सहित चैत सिंह व तुलसी राम की जमानत निरस्त करते हुए शेष कारावास की सजा काटने के लिए संबंधित न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश जारी किये है।
