नाले में तब्दील हिरन नदी को पुराने स्वरूप में लौटने का इंतजार

आदित्य सिंह

पर्यावरण दिवस पर विशेष
सीधी:विश्व पर्यावरण दिवस लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है । यह दिन हर साल 5 जून को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए जन सहयोग को बढ़ावा देना है। विडंबना यह है कि सीधी जिले में विश्व पर्यावरण दिवस पर शासकीय स्तर से कार्यक्रम तो आयोजित होते हैं लेकिन सरकारी अमला स्वयं इस पर अमल करने की बजाय औपचारिकता निभाने में ज्यादा लगा है। इसकी सबसे बड़ी बानगी जिला मुख्यालय में प्रवाहित पुरानी हिरन नदी है जो अतिक्रमण के स्वार्थ फंसकर नदी से नाले में तब्दील हो चुकी है। यह जरूर है कि शहर के पर्यावरण प्रेमियों ने अब आगे आकर हिरन नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए भागीरथी प्रयास शुरू किए हैं।
जनभागीदारी से हुई हिरन नदी के उद्गम की सफाई-
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सीधी के समीपी ग्राम पंचायत खैरही अंतर्गत झोरा पहरी स्थित हिरन नदी उद्गम स्थल की जिला व्यापारी संघ अध्यक्ष एवं स्थानीय समितियों के सहयोग से साफ-सफाई की गई। हिरन नदी बचाओ मुहिम में जनभागीदारी से हिरन नदी उद्गम की सफाई शुरु होने से लोगों में भी उत्साह नजर आया। शहर की पुरानी हिरन नदी के उद्गम स्थल झोरा पहरी में जिला व्यापारी संघ अध्यक्ष लालचंद गुप्ता एवं स्थानीय समितियों के सहयोग से साफ-सफाई का अभियान चला। अभियान के दौरान समीपी ग्राम पंचायत खैरही अंतर्गत पहाड़ के नीचे से निकली हिरन नदी के उद्गम स्थल पर साफ-सफाई का अभियान शुरू किया गया। जन भागीदारी से हिरन नदी के उद्गम स्थल की सफाई के अभियान में स्थानीय समितियों के पदाधिकारी एवं सदस्यगण भी शामिल रहे। हिरन नदी के उद्गम स्थल को पुर्नजीवित करने के लिए लोगों ने फावड़ा उठाकर घंटों जल स्त्रोत को पुर्नजीवित करने की अनूठी पहल शुरू की।
पहाड़ के नीचे से है हिरन नदी का उद्गम स्थल
हिरन नदी के उद्गम स्थल में उसका जल पहाड़ के नीचे गड्ढों में प्राकृतिक रूप से पहुंचता है। उसके बाद पानी आगे के लिए बढ़ता है। हिरन नदी के उद्गम स्थल की उपेक्षा के चलते वर्तमान में उसके जल स्त्रोत मिट्टी के नीचे दब गए हैं। ऐसे में उसे नदी का स्वरूप उद्गम स्थल से देने के लिए जेसीबी मशीन की जरूरत है। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत वर्तमान में जल स्त्रोतों के संरक्षण एवं साफ-सफाई के लिए जो अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है उसके तहत हिरन नदी के उद्गम स्थल को भी जनभागीदारी से काम शुरू होने के बाद जोड़ा गया है।
हिरन नदी के उद्धार के लिए जारी रहेगी पहल : लालचंद
जिला व्यापारी संघ अध्यक्ष लालचंद गुप्ता ने हिरन नदी के उद्गम स्थल झोरा पहरी में जन सहयोग से साफ-सफाई के दौरान कहा कि हिरन नदी पहले जल से काफी समृद्ध नदी थी। लोगों के स्वार्थ के चलते जगह-जगह उसके जल स्त्रोत बंद हो गए। हिरन नदी के उद्गम स्थल में ही जल स्त्रोत काफी दब गए हैं। उद्गम स्थल पर नदी के पुर्नजीवित करने के लिए यहां वृहद स्तर पर जेसीबी मशीन से खुदाई करने की आवश्यकता है। उनके द्वारा हिरन नदी के उद्गम स्थल के संबंध में पूरी जानकारी शासन को भेंज कर पहल जारी रखी जाएगी। जिससे हिरन नदी को उद्गम स्थल से पुर्नजीवित कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही शुरू हो सके।
रामगढ़ समिति एवं सोनांचल समिति ने सफाई में निभाई सहभागिता
हिरन नदी के उद्गम स्थल झोरा पहरी में जन सहभागिता से चले सफाई अभियान में रामगढ़ समिति एवं सोनांचल समिति ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। सफाई अभियान के लगे लोगों द्वारा उद्गम स्थल में भूमि में दबे जलस्त्रोतों को फावड़े से खुदाई कर बाहर लाने का प्रयास किया गया। जिससे जल स्त्रोतों से पानी की धार तेजी से बाहर निकल सके। जल स्त्रोतों के मिट्टी के नीचे काफी दब जाने के कारण उनको साफ करने में भी काफी दिक्कतें बनी हुई थीं। सफाई में जुटे लोगों का कहना था कि उद्गम स्थल में हिरन नदी के जल स्त्रातों के सफाई का काम जेसीबी मशीन के माध्यम से खुदाई के द्वारा अच्छे से हो सकता है। इसके लिये शासन की मदद मिलना काफी आवश्यक है।
हिरन नदी के उद्गम की सफाई में इनका रहा योगदान
जिला मुख्यालय के समीपी ग्राम पंचायत खैरही अंतर्गत झोरा पहरी स्थित हिरन नदी के उद्गम स्थल की साफ-सफाई में जिला व्यापारी संघ अध्यक्ष लालचंद गुप्ता, इन्द्रवती नाट्य समिति सीधी के संयोजक नीरज कुंदेर के साथ समितियों के पदाधिकारी एवं सदस्यों का अहम योगदान रहा। सफाई में अहम सहभागिता निभाने वालों में अमित गौतम, उदय गुप्ता, रामजी गौतम, आलोक गुप्ता, मुकेश सोनी, पवन मिश्रा, सौरभ मिश्रा, भूपेन्द्र विश्वकर्मा, कमलाकर प्रसाद गौतम शामिल रहे।

Next Post

बिछिया नदी तोड़ रही दम

Thu Jun 5 , 2025
डॉ रवि तिवारी रीवा : जिले की जीवन रेखा कही जाने वाली बिछिया नदी बहुत बुरे दौर से गुजर रही है. आधी नदी के सूख जाने से लोगों ने उसे खेत बना डाला है जबकि बचे खुचे हिस्से पर जलकुम्भी ने कब्जा कर रखा है. 12 महीने बहने वाली बिछिया […]

You May Like