
कुक्षी।रामचरित्र मानस एक ऐसा ग्रंथ है जो हमें जीवन जीने की कला सिखाता है,बाबा तुलसीदासजी ने इस ग्रंथ की रचना करके हमें भगवान राम के चरित्र और उनके आदर्शों को समझने का अवसर प्रदान करता है।यह उदगार
आष्टा के प्रसिद्ध कथाचार्य पंडित हरिमाधवजी महाराज नें
इच्छापूर्ण हनुमान मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीरामकथा के पांचवे दिन कथा श्रवण कर रहे श्रदालुओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये.उन्होंने राममयी वातावरण में आयोजित रामसीता विवाह के अवसर पर कहा की विवाह संस्कार सनातन धर्म की एक पद्धति है जो सोलह संस्कारों में से एक संस्कार है और पति पत्नी जीवन की गाड़ी के दो पहिये है जो प्रेम और विश्वास से चलते है जहां प्रेम और विश्वास है वहां गृहस्थ जीवन आनंद से चलता है.उन्होंने आजकल मंहगे होते जा रहे विवाह समारोह पर चिंता जाहिर करते हुए कहा की विवाह में कई अनावश्यक खर्चे जुड़ते चले जा रहे है और नई-नई.कड़ियां जुड़ती चली जा रही है इसको लेकर समाज को चिंतन करना चाहिए.और विवाह को एक पवित्र और अर्थपूर्ण संस्कार के रूप में मनाने का प्रयास करना चाहिए।
आयोजन में मंदिर की उत्सव समिति के साथ बालाजी महिला मंडल की महिलाएं सक्रियता के साथ जुटी हुई है।
