उम्रकैद की सजा हाईकोर्ट ने की निरस्त

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ ने निचली अदालत द्वारा पड़ोसन की हत्या के प्रकरण में डिंडौरी निवासी रघु उर्फ राजेंद्र कछवाहा को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को अनुचित पाते हुए उसे निरस्त कर दिया है।अपीलकर्ता रघु उर्फ राजेन्द्र कुशवाहा की ओर से अधिवक्ता गिरीश कुमार राव ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि डिंडौरी की अदालत ने सात फरवरी 2023 को हत्या के प्रकरण में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसी फैसले से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट में पुनर्विचार की मांग की गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अपीलकर्ता ने हत्या नहीं की थी, वह बेगुनाह था। पुलिस ने वास्तविक आरोपित की गिरफ्तारी के अभाव में महज संदेह के आधार पर उसे आरोपित बनाकर प्रकरण अदालत में प्रस्तुत कर दिया।

चूंकि बिना ठोस कानूनी आधार के हत्या के मामले में दोष सिद्धि की गई है, अत: निरस्त किए जाने योग्य है। दरअसल, यह एक ऐसा मामला है जिसमें ट्रायल कोर्ट ने बिना किसी मेडिकल या दस्तावेजी साक्ष्य के मनमाने तरीके से सजा सुनाई है। मृतक सीता का पोस्टमार्टम नहीं किया गया था। घायल सीताबाई ने अपने बयान दर्ज कराए थे, जिसमें अपीलकर्ता पर उंगली नहीं उठाई थी। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।

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