
सुसनेर।क्षेत्र के शासकीय मंदिरों का प्रबंधन भले ही शासन के हाथों में हो तथा कलेक्टर के प्रतिनिधि के तौर पर स्थानीय प्रशासन के नुमांइदों पर इन मंदिरों के देखरेख की जिम्मेदारी भी हो लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरत रहे हैं. शासन के धर्मस्व विभाग के अधीन तहसील के कुल 171 मंदिर शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज हैं. इनमें केवल एक ही मंदिर का हिसाब किताब रखा जाता है.
शासन के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में पुजारी भले ही नियुक्त हो, किंतु इन मंदिरों में एक को छोडक़र बाकी मंदिरों में आय का कोई भी हिसाब किताब मौजूद नहीं है. कहने को धर्मस्व विभाग के अधीन आने वाले इन मंदिरों के मुखिया व्यवस्थापक के तौर पर कलेक्टर होते हैं. किंतु वे जिम्मेदारी पर कितना ध्यान देते हैं, यह उसका एक उदाहरण है. नगरीय क्षेत्र की आबादी 18 हजार के लगभग है. नगरीय क्षेत्र में करीब 9 मंदिर ऐसे हैं जो धर्मस्व विभाग के अधीन हैं. इन मंदिरों में सैकड़ों की संख्या में लोग दर्शन करने प्रतिदिन जाते हैं, किंतु इनमें से एक भी मंदिर का हिसाब किताब शासन के पास मौजूद नहीं है. तहसील का हनुमान पिपलिया बालाजी मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है, जिसका हिसाब शासन रख रहा है. इस मंदिर के नाम पर बड़ी मात्रा में चल अचल संपत्ति मौजूद है.
इनका कहना है
सुसनेर तहसील में शासकीय रिकॉर्ड में 171 शासकीय मंदिर दर्ज है. इनमें से हनुमान पिपलिया बालाजी मंदिर का ही हिसाब किताब है. शेष 170 मंदिरों का कोई भी हिसाब किताब रखने के लिए डाक्यमेन्ट्री तैयार की जा रही है. धर्मस्व विभाग में दर्ज इन मंदिरों की कहां कहां और कितनी जमीनें हैं, इसकी भी छानबीन की जाएगी.
– विजय सेनानी, तहसीलदार, सुसनेर
