पूर्व प्रोबेशनर आईएएस खेडकर को सशर्त अग्रिम जमानत

नयी दिल्ली, 21 मई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व प्रोबेशनर अधिकारी पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका को बुधवार को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत की अर्जी मंजूर की। खेडकर पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पीडब्ल्यूबीडी (बेंचमार्क विकलांग व्यक्ति) का जाली प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप हैं।

खेडकर ने अग्रिम जमानत की अर्जी नामंजूर करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा, “अपराध की प्रकृति और तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह ऐसा मामला है, जिसमें उच्च न्यायालय को अग्रिम जमानत की अर्जी मंजूर करनी चाहिए थी। ”

जनवरी में खेडकर को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली थी, जिसे अब स्थायी कर दिया गया है।

शीर्ष अदालत ने आज के आदेश में कहा है कि गिरफ्तारी की स्थिति में, अपीलकर्ता को 25,000 रुपये की नकद जमानत और दो जमानतदारों की जमानत पर रिहा किया जाएगा। उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा, वह अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। गवाहों को प्रभावित और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। प्रतिवादी किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में जमानत रद्द करने की मांग करने को स्वतंत्र होगा।

न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि खेड़कर जांच एजेंसी के साथ जांच में पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रही थीं। अभियोजन पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उन पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

खेडकर के वकील अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इन दलीलों का विरोध किया और कहा कि उनका मुवक्किल कानूनी सुरक्षा की हकदार हैं।

खेडकर के खिलाफ यूपीएससी की ओर से दायर मामले में कहा गया है कि उन्होंने ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों के तहत आरक्षण का दावा करने के लिए जाली दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

इससे पहले, 18 मार्च को शीर्ष अदालत ने खेडकर को गिरफ्तारी के प्रति दी गयी अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ा दी थी और उनसे हिरासत में लेकर पूछ ताछ करने के दिल्ली पुलिस के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2024 में खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि वह वंचित वर्गों के लिए लाभ की पात्र नहीं थी और उन्होंने जालसाजी और गलत बयानी की थी।

खेडकर जून 2024 में आईएएस प्रोबेशनर के रूप में पुणे कलेक्ट्रेट में तैनात की गयी थीं। उनके चयन को लेकर उठे सार्वजनिक विवाद और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के बाद यूपीएससी ने उनके चयन को रद्द करने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था तथा उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से रोक दिया था।

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह स्पष्ट किया है कि जमानत की शर्तों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

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