रेलवे: इंटरलॉकिंग प्रणाली से मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हुई

भोपाल। रेलवे विभाग द्वारा भोपाल मंडल में हाल ही में आठ स्टेशनों पर इंटरलॉकिंग प्रणाली का आधुनिकीकरण किया गया है. जहां अब इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली प्रभावी रूप से कार्य कर रही है. इस आधुनिक प्रणाली के माध्यम से न केवल संचालन सुरक्षित हुआ है, बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी नगण्य हो गई है. भोपाल–इटारसी खंड में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली की स्थापना से सेक्शन की परिचालन क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है. इसका प्रत्यक्ष लाभ ट्रेनों की गति और समयबद्धता में सुधार के रूप में यात्रियों को मिल रहा है. भोपाल मंडल यात्रियों की संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तकनीकी सुदृढ़ता की दिशा में निरंतर अग्रसर है. इंटरलॉकिंग प्रणाली का यह सशक्त नेटवर्क रेलवे की संरचना को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है.

वर्तमान में मंडल के 50 से अधिक स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली कार्यरत है. इसके अतिरिक्त, बीना गुड्स यार्ड में पुरानी यांत्रिक प्रणाली को हटाकर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को लागू किया गया है, जिससे असुरक्षित परिस्थितियों की संभावना में कमी आई है. इससे न केवल संरक्षा मजबूत हुई है, बल्कि ट्रेनों का संचालन अधिक दक्षता से संभव हो पाया है.

 

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