सुप्रीम कोर्ट ने माकपा नेता ए राजा की विधायकी बहाल किया, केरल उच्च न्यायालय का आदेश खारिज

नयी दिल्ली, 06 मई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में देवीकुलम विधानसभा क्षेत्र से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक ए राजा का चुनाव रद्द करने वाला केरल उच्च न्यायालय का फैसला मंगलवार को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने श्री राजा की याचिका पर यह फैसला दिया।

पीठ ने विधायक द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उच्च न्यायालय के 23 मार्च, 2023 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय के उस फैसले पर कहा गया था कि श्री राजा अनुसूचित जाति-आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं, क्योंकि वह कथित तौर पर केरल (राज्य) के भीतर ‘हिंदू पारायण’ समुदाय के सदस्य नहीं हैं।

पीठ की ओर से न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने फैसला सुनाते हुए कहा, “उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले को खारिज किया जाता है और चुनाव याचिका खारिज की जाती है। अपीलकर्ता पूरी अवधि के लिए विधानसभा के सदस्य के रूप में सभी परिणामी लाभों का हकदार है।”

केरल उच्च न्यायालय ने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार डी कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया था। कुमार ने आरोप लगाया था कि राजा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 05 के तहत अयोग्य थे। उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा था कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र के लिए उम्मीदवार को संबंधित राज्य के अनुसूचित जाति से संबंधित होना चाहिए।

कुमार ने तर्क दिया कि राजा के पैतृक वंश का पता तमिलनाडु के तिरुनेलवेली से लगाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार ने चर्च के बपतिस्मा रिकॉर्ड, ईसाई शैली की शादी की तस्वीरों और कुंडला, केरल में सीएसआई चर्च द्वारा बनाए गए परिवार रजिस्टरों का हवाला देते हुए ईसाई धर्म अपना लिया था।

उच्च न्यायालय ने चर्च के रिकॉर्ड में विसंगतियां और ओवरराइटिंग पाई और माना कि राजा ने ईसाई धर्म अपना लिया था और इसलिए वह हिंदू अनुसूचित जाति विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के हकदार नहीं हैं।

दूसरी तरफ, श्री राजा ने अपने बचाव में कहा कि वह केरल के हिंदू पारायण समुदाय से हैं। उनके माता-पिता हिंदू थे और उनका कोई धर्म परिवर्तन नहीं हुआ था।

उन्होंने चर्च के रिकॉर्ड और शादी की तस्वीरों से उच्च न्यायालय के निष्कर्षों की वैधता पर भी विवाद किया। उन्होंने कहा कि रिकार्ड की गलत व्याख्या की गई थी।

शीर्ष अदालत की सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया था कि श्री राजा के जाति प्रमाण पत्र को सीधे तौर पर चुनौती क्यों नहीं दी गई। क्या उच्च न्यायालय ने उस प्रमाण पत्र की वैधता पर निर्णय लिए बिना चुनाव को अमान्य घोषित करने में सीमा लांघी थी।

शीर्ष अदालत ने 29 अप्रैल, 2023 को उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें श्री राजा को मतदान के अधिकार या मौद्रिक लाभ के बिना, विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। उनको यह राहत उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय आने तक मिली थी।

इस मामले में शीर्ष अदालत के विस्तृत फैसले का इंतजार है।

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