नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (वार्ता) दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार बेहतर आधारभूत संरचना और प्रदूषण मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में लगातार प्रतिबद्धता और तत्परता के साथ कार्य कर रही है।
‘विकसित दिल्ली’ की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए श्री सिरसा ने आज पश्चिमी दिल्ली स्थित राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने रिहायशी इलाकों में नागरिक और पर्यावरणीय उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई के लिए स्पष्ट निर्देश दिए, जो स्थानीय निवासियों की जीवन शैली को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि रिहायशी इलाकों में अवैध और बिना लाइसेंस के चल रही कच्चे मांस की दुकानें, ढाबे, प्रदूषण फैलाने वाले तंदूर, अवैध डेनिम फैक्ट्रियाँ, डाईंग यूनिट और अन्य औद्योगिक इकाइयाँ प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि हज़ारों की संख्या में अवैध मांस की दुकानें और ढाबे रिहायशी क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये अवैध गतिविधियाँ नागरिकों की आवाजाही में भी बाधा उत्पन्न करती हैं।
श्री सिरसा ने इस दौरान अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा, “अवैध गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा एवं आदेश दिया कि अवैध कच्चे मांस की दुकानें, ढाबे और प्रदूषण फैलाने वाले गैरकानूनी प्रतिष्ठानों को तुरंत बंद कराया जाए और इस दिशा में कार्यवाही अगले 24 घंटों के भीतर शुरू की जाए।”
उन्होंने कहा, “मुझे कई बार स्थानीय निवासियों द्वारा सूचित किया गया है कि सड़कों पर अवैध अतिक्रमण, अवैध कच्चे मांस की दुकानें, प्रदूषण फैलाने वाले अवैध प्रतिष्ठान और अवैध पार्किंग के कारण आमजन, खासकर महिलाओं को सड़कों पर आवाजाही में भारी परेशानी होती है। ऐसे सभी अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा।”
मंत्री ने सड़कों पर जलभराव की गंभीर स्थिति का गहन निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसे प्राथमिकता के साथ शीघ्र ठीक किया जाए और कहा, “सड़कों पर गंदगी और पानी का जमा होना न केवल स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, बल्कि यह नागरिकों के सुरक्षित आवागमन में भी बड़ी बाधा उत्पन्न करता है।”
उन्होंने कहा, “लाउडस्पीकर का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइंस के हिसाब से ही होना चाहिए, और हमें इसका पालन करना चाहिए।”
इस निरीक्षण में डीडीए, एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड और बीएसईएस जैसे विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, जिससे यह सुनिश्चित हो कि सभी समस्याओं का समाधान प्रभावी और समन्वित प्रयासों के तहत किया जा सके।
