ओंकारेश्वर: तीर्थनगरी ओंकारेश्वर साउथमय हो गई हैै। दक्षिणभारतीय तीरीके से मंदिरों में पूजा करते लोग दिख रहे हैं। हजारों लोग ओंकारेश्वर के नर्मदाघाटों पर पहुंचे हैं। ये 12 मई तक रहेंगे। धार्मिक अनुष्ठान विद्वान पंडितों के मंत्र उपचार के साथ तीर्थ नगरी ओमकारेश्वर में प्रतिदिन चल रहा है। संतों की उपस्थिति में ओंकारेश्वर में नर्मदा पुष्कर महोत्सव चल रहा है।
कांची कामकोटि मठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती स्वामीजी के मार्गदर्शन में श्री महालक्ष्मी चैरिटेबल ट्रस्ट, चेन्नई यह आयोजन करवा रहा है। तमिलनाडु के संत एचएच सेनगोल अधीनम और पांडिचेरी के स्थानीय प्रशासन मंत्री नम: सिवायम की उपस्थिति में नर्मदाजी के ब्राह्मण घाट पर शाम को मां नर्मदाजी की आरती की गई। रायचूर के सतीश और तमिलनाडु के नादस्वरम का नृत्य किया गया।
नर्मदाजी का बड़ा महत्व
देश में 12 प्रमुख पवित्र नदियों के किनारे तीर्थस्थलों पर पूर्वजों की पूजा, आध्यात्मिक प्रवचन,भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है।
यह दुनिया धार्मिक महत्व की नदियों और झीलों जैसे 35 मिलियन जल निकायों से संपन्न है। पवित्रता के इन जल में स्नान करने से व्यक्ति को दैवीय कृपा का आनंद प्राप्त होता है।
क्या है महोत्सव?
बृहस्पति ग्रह हर साल एक घर से दूसरे घर में प्रवेश करता है, तो उस घटना को पुष्कर महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम की मुख्य आयोजक महालक्ष्मी चैरिटेबल ट्रस्ट की महालक्ष्मी सुब्रमण्यम ने बताया कि यह त्यौहार हर साल भारत की विभिन्न नदियों में मनाया जाता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि भगवान गुरु (बृहस्पति) किस घर में स्थित हैं।
रोज ये दिनचर्या
कार्यक्रम प्रतिदिन प्रात: 7 बजे से नधास्वरम आयोजित होगा। इसके बाद प्रात: 8 बजे से महन्यासा रुद्र, वेद पारायणम, प्रात: 10 बजे से काम्यार्थ होम और यज्ञ, प्रात: 11 बजे से पूर्णाहुति, प्रात: 11.30 बजे से माँ नर्मदा नदी तीर्थावारी तथा सायं 6 बजे से नर्मदा नदी पुष्कर आरती होती है।