नयी दिल्ली, (वार्ता) समाजवादी पार्टी के जियाउर्रहमान ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वक्फ विधेयक को लेकर मुसलमानों को गुमराह किया जा रहा है।
श्री जियाउर्रहमान ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुये कहा कि वक्फ बोर्ड में दूसरे समुदाय के लोगों को सरकार क्यों रखना चाहती है, क्या अन्य समुदायों के ऐसे बोर्ड में दूसरे समुदाय के लोगों को जगह दी जाती है। सरकार क्या कानून में संशोधन करके दूसरे समुदाय के लोगों के धार्मिक बोर्ड में अन्य समुदायों के लोगों को रखे जाने का कानून बनाया जायेगा।
भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार जोत ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से दो अप्रैल का दिन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों के लिये काला दिवस माना जायेगा। उन्होंने कहा कि आज एक धर्म के लोगों को दूसरे से लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इतिहास गवाह है, जब-जब सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर दुश्मन से लड़े हैं तो वे जीते हैं और जब-जब अलग होकर दुश्मन से लड़े हैं तो पराजित हुये हैं। उन्होंने कहा कि आज मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, कल अन्य धर्मों के लोगों को निशाना बनाया जायेगा।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मुस्लिम क्रांतिकारियों ने भी आजादी की लड़ाई में योगदान दिया तभी देश आजाद हो सका। इस तरह के विधेयक लाने के बजाय मुसलमानों की आर्थिक ,सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय किये जाने चाहिये। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियां तो उद्याेगपतियों के लिये होती हैं। इस विधेयक को लेकर राजस्थान के मुसलमान कह रहे हैं कि यह उनके हितों पर कुठाराघात है। वह इस विधेयक का विरोध करते हैं।
निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख ने कहा कि मुसलमानों को वक्फ संपत्तियों को बेहतर इस्तेमाल करके कालेज और विश्वविद्यालय बनवाने चाहिये। मुसलमानों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिये और इसके बाद अपने हक के फैसले करने चाहिये। हिन्दुस्तान के मुसलमानों की अपनी पहचान है।
केरल कांग्रेस के के फ्रांसिस ने कहा कि इस विधेयक में आवश्यक संशोधन किये जाने चाहिये। इस विधेयक में मुसलमानों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है। सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकार कम करना चाहती है।
आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों की मस्जिदों और खानकाहों को निशाना बनाया जा रहा है। यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन करता है। इस विधेयक के प्रावधानों के लागू होने से सरकार स्टिकर लगाकर किसी भी मस्जिद को बंद कर देगी। श्री ओवैसी ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक धार्मिक इदारा है।
