सियासत
इंदौर जिले की भाजपा राजनीति में राजनीतिक समीकरण फिर बदल गए हैं. पिछले तीन वर्षों से गौरव रणदिवे, जयपाल सिंह चावड़ा और मनोज पटेल की तिकड़ी एक साथ काम कर रही थी. इस गुट में कभी-कभी सावन सोनकर और सुदर्शन गप्ता भी जुड़ जाते थे, लेकिन अब मनोज पटेल इस अंदरुनी प्रेशर ग्रुप से बाहर आ गए हैं. इसका कारण जयपाल सिंह चावड़ा और गौरव रणदिवे का कमजोर होना है.
मनोज पटेल आजकल उषा ठाकुर और मालिनी गौड़ के साथ मिलकर शक्तिशाली मंत्री गुट का मुकाबला कर रहे हैं. विधायकों के इसी त्रिगुट ने ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद पर चिंटू वर्मा का रास्ता रोका था. जिला अध्यक्ष के चुनाव तक इस गुट को कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट का समर्थन भी हासिल था लेकिन अब ऐसा नहीं है. तुलसी सिलावट अब उषा ठाकुर, मनोज पटेल और मालिनी गौड़ की तिकड़ी से दूरी बनाए हुए हैं.
भाजपा में मनोज पटेल, उषा ठाकुर और मालिनी गौड़ को नंदा नगर गुट का कट्टर राजनीतिक विरोधी माना जाता है. यह तीनों विधायक अपने तरीके से मंत्री गुट की शक्ति के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं लेकिन इनके अलावा भी एक गुट सामने आया था. इस खेमे में गौरव रणदिवे, सुदर्शन गुप्ता और जयपाल सिंह चावड़ा जैसे नेता थे, लेकिन ग्रामीण अध्यक्ष पद पर श्रवण सिंह चावड़ा और नगर भाजपा अध्यक्ष पद पर सुमित मिश्रा के आने से समीकरण फिर बदल गए हैं. अब सुदर्शन गुप्ता, गौरव रणदिवे और जयपाल सिंह चावड़ा के साथ कम दिखाई देते हैं.
हालांकि उनका शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर से राजनीतिक रिश्ता बना हुआ है लेकिन सुदर्शन आजकल कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ भी खूब दिखाई देते हैं. सुदर्शन गुप्ता मूल रूप से तो कैलाश विजयवर्गीय के विरोधी रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में वो विजयवर्गीय की उपेक्षा करने की स्थिति में नहीं है. इसी वजह से सुदर्शन गुप्ता अलग हो गए हैं. कुल मिलाकर इंदौर जिले के राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बदलने लगे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इंदौर में सभी को साथ में लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं
