नयी दिल्ली, 18 मार्च (वार्ता) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार आम लोगों के लिए रेल यात्रा को सुगम बना रही है और इसके लिए उनका मंत्रालय जनरल कोच तथा स्लीपर कोच ज्यादा संख्या में लगाने पर फोकस कर रहा है ताकि देश के आम नागरिकों को रेलवे की सेवा का पूरा लाभ मि सके।
श्री वैष्णव ने मंगलवार को लोकसभा में वर्ष 2025-26 के रेल मंत्रालय के नियंत्राधानीन अनुदानों की मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि रेलवे में भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा में पेपरलीक जैसी कोई समस्या अब नहीं हो रही है और सहज तथा सरलता से रेलवे के पेपर कराए जा है। हाल ही में बड़े स्तर पर और पांच दिन तक रेलवे की भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया। यह परीक्षा पांच दिन तक देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई लेकिन कहीं कोई दिक्कत नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि रेलवे ने पांच लाख लोगों को नौकरी दी है और आरक्षण के सभी नियमों का पालन किया गया है। पहली बार रेलवे में भर्ती का कलेंडर तैयार किया गया है और उसका पालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि रेलवे के सामान्य कोच बढाने की बात आई है । जनरल और स्लीपर और जनरल कोट 56 हजार हैं। यानी 74 प्रतिशत जनरल और स्लीपर कोच है। अब सरकार 17 हजार जनरल कोच बढा रही है ताकि गरीब आदमी को रेलवे में सफर करने में कोई दिक्कत नहीं हो। भीड़ भाड़ को निंयत्रित करने के लिए पिछले कई स्पेशल ट्रेन चलाई गई। होली, दीपावली, छठ पर और अब महाकुंभ के दौरान हजारों विशेष रेलों का संचालन किया गया है। लगातार नये फ्लाईओवर बन रहे हैं और नये रेलवे स्टेशनों का काम किया गया है। कुंभ के दौरान नये स्टेशन बनाए गये, नये फ़लाइओवर ब्रिज और अंडर पास बनाए गये ताकि यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। अभी होली में सरकार ने 1160 ट्रेने इस बार होली पर विशेष रूप से चलाई गई है। रेलवे स्टेशनों पर सब जगह सीसी टीवी कैमरा लगाए जा रहे हैं। कर्मचारियों के लिए नये डिजाइन के ड्रेस बनाए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनरल कोच, स्लीपर कोच, अमृत भारत, वंदे भारत कोच बनाए जा रहे हैं और इन ट्रेनों की संख्या बढे इसके लिए कोच की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। मुंबई में लोकल रेल की स्थिति सुधारने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में 238 नयी ट्रेन मुंबई के लोगों के लिए बनाई जा रही हैं ताकि लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। कर्नाटक में बेंगलुरु के लिए रेलों के निर्माण को लेकर कुछ दिक्कतें आ रही हैं उनका समाधान कर लिया गया है और इसके लिए कोचों का निर्माण चेन्नई में किया जा रहा है।
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में 68 में 49 डिविजन ऐसे हैं जहां रेल परिचालन दक्षता बढी है और 12 डिविजन में पंक्चुलिटी 95 प्रतिशत पहुंच गई है। संचार व्यवस्था के लिए 20 हजार कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। जम्मू से श्रीनगर को रेले से जोड़ने के सपने को पूरा कर लिया गया है। चिनाव के पुल की ऊंचाई के मयाने में रिकार्ड है और जल्द से जल्द जम्मू से श्रीनगर के बीच ट्रन का संचालन किया जाएगा और देश को बहुत बड़ा सपना पूरा हो सकेगा।रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे भेदभाव के बिना काम करता है। उनका कहना था कि रेलवे में टनल बोरिंग मशीन-टीबीएम का इस्तेमाल मेट्रो की टनल तथा अन्य काम आती है इसका निर्माण अब तमिलनाडु में होने लगा है। गंगाजी में चार पुल रेलवे ने बनाए हैं और तीन पुल निर्माणाधीन है। झारखंड के लिए 450 करोड का बज होता था आज पांच हजार करोडृ केरल के तलिए 300 होता मध्य प्रदेश के लिए 14 हजार करोड़ पंजाब के लिए 225 करोड होता था आज 5050 करोड रुपए का बजट है। तमिलनाउु के लिए 800 करोउ रुपए होता 6626 हजार करोड रुपए का बजट है। तेलंगाना के लिए 5550 करोड उत्तर प्रदेश में 1000 करोड रुपए से बढाकर 19 हजार करोड रुपए हो गया है। पश्चिम बंगाल में 14000 करोड रुपए का बजट है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2020 से रेल का किराया नहीं बढाया है और इससे गरीबों के लिए रेलवे का सफर आसान हो रहा है। अन्य पड़ोसी देशों से तुलना करें तो भारत में रेलवे का किराया कम है। रेलवे अपने यात्रियों को पांच हजार करोड रुपए की सब्सिडी देती है। भारत दुनिया में तीन सबसे बड़े लाजस्टिक देशों में शामिल हो गया है और इस साल 1.6 अरब कार्गो की ढुलाई करेगा। इसके साथ ही देश चीन और अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बडा हब बन गया है। देश में 34 हजार रेलवे ट्रैक बने हैं जो जर्मनी के नेटवर्क से भी ज्यादा है। देश में 50 किलोमीटर रेल पटरियां बदली गई हैं। इंजन का उत्पादन 1400 पहुंच गया है। देश में दो लाख बैगन जोड़े गये हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत से रेलवे का निर्यातक बन गया है और ब्रिटेन, फ्रास, स्पेन, जर्मनी, इटली हमारे कोच जा रहे हैं। तमिलनाडु से बने रेल के पहिये दुनिया में भारत से निर्यात किये जा रहे हैं। पांच लाख लोगों को रेलवे ने रोजगार उपलब्घ कराया है। रेलवे में सुरक्षा को लेकर सरकार बहुत सतर्क है जिसमें ट्रेक मेंटेनेंस के लिए नयी तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
