मामला वार्ड 64 के चितावद काकड़ का
इंदौर: पिछले कुछ वर्षों से यह सुनते आ रहे थे कि सैकड़ों बुजुर्ग और विधवाऐं है जिनकी पेंशन बंद हो चुकी है. अब तो सरकार ने उन गरीब विधवाओं को भी सहायता राशी से वचिंत कर दिया है जो उन्हें पति के मृत्यु के तुरंत बाद दी जाती थी.ऐसा ही मामला वार्ड क्रमांक 64 में देखने को मिला है. इस वार्ड में अस्सी प्रतिशत क्षेत्र मज़दूर एवं निम्न वर्ग से भरा पड़ा है. वार्ड के चितावद काकड़ जो कि तीन ईमली बस स्टैंड के पीछे आता है, इस क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे वास करने वाले एवं मज़दूर वर्ग रहता है. शिव मंदिर के पास क्षेत्र के कई बुजुर्गों की पेंशन पूरी तरह बंद हो चुकी है.
बुजुर्ग महिलाएं इसको लेकर काफी चिंतित है. क्षेत्रीय पार्षद से लेकर झोन एवं बैंक तक के चक्कर काटने के बाद भी ये लाचार और बेबस लोग लाभ से अब तक वंचित हैं. इसके अलावा भी सहायता राशि का मामला सामने आया है. मज़दूर श्रेणी में आने वाले पुरूष के निधन होने के तुरंत बाद ही उनकी विधवा को सहायता राशी दस हज़ार दी जाती थी. चितावद काकड़ में भी कुछ ऐसी विधवा है जिन्हें आज तक उस राशि से वंचित रखा गया है. ऐसे मामले देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा पैसा बांटने वाली सभी योजनाए बंद कर रही है.
इनका कहना है
पेंशन से छोटे-मोटे खर्च निकल जाते थे. मेरी पेंशन पिछले बारह महीने से रूकी है. तीन-चार चक्कर पार्षद के पास और झोन पर भी गई. बस कहते हंै आ जाएगी. अभी बीमार हूं इलाज के लिए बेटी से पैसे लिए.
– रामकली बाई सालीग्राम
पति का निधन हुए बीस वर्ष हो चुके हैं. मुसीबत झेल कर बच्चों को पाला. छोटे बच्चे आज बड़े हो गए लेकिन सरकार ने विधवा पेंशन का लाभ नहीं दिया. कितनी ही बार गिड़गिड़ा आई किसी को फर्क नहीं पड़ा.
– रेखा सिलावट
कई बार बोला लेकिन पेंशन चालू नहीं की. यहां तक की पति के देहांत के बाद मिलने वाली सहायता राशी दस हज़ार रूपए भी आज तक नहीं दिए गए. इसके लिए भी सभी दस्तावेज जमा किए लेकिन कुछ नहीं हुआ.
– लक्ष्मी बाई बोरासी
