विज ने चटर्जी फुटबॉल ट्रॉफी के विजेताओं को किया सम्मानित

चंडीगढ़, (वार्ता) हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने रविवार काे एसडी चटर्जी फुटबाल ट्राफी के दौरान पुराने फुटबाल खिलाड़ियों को सम्मानित किया तथा पुराने खिलाड़ियों की तस्वीरें लगाकर उन्हें याद किया ।

श्री विज ने आज शाम अम्बाला छावनी के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम के फीफा एप्रूव्ड फुटबॉल ग्राउंड में एसडी चटर्जी ट्रॉफी के फाइनल मैच के उपरांत लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें यह अच्छा लगा कि प्रतियोगिता आयोजक फुटबाल लवर्स वेलफेयर सोसाइटी ने दादा एसडी चटर्जी के नाम से प्रतियोगिता का आयोजन किया। “वो कौमे फना हो जाया करती है जो अपने पूर्वजों को याद नहीं करती”। उन्हें अच्छा लगा कि आज चटर्जी के परिवार सदस्य भी कई सालों बाद यहां आए है और यह चटर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि है जो उन्होंने इस शहर के लिए किया और कई खिलाड़ी तैयार किए। उन्हें यह अच्छा लगा कि फुटबॉल संस्था का नाम ‘फुटबाल लवर्स वेलफेयर सोसाइटी’ रखा। खेलने वाले तो तैयार हो सकते है, मगर आवश्यकता लवर्स की है।

उन्होंने कहा कि मैनें इस मैदान में फुटबाल मैच देखे हैं, मैदान चारों ओर से भरा हुआ होता था और दर्शकों में ऐसा जोश होता था। मानों वह ही फुटबाल खेल रहे हों। मैनें दादा एसडी चटर्जी को देखा है जोकि जोश के साथ फुटबाल खिलाड़ियों को खेल के बारे में बताते थे। समय था जब अम्बाला छावनी फुटबाल का गढ़ था। इस स्टेडियम में मैच होते थे जिन्हें देखने सैकड़ों लोग आते थे। गांधी ग्राउंड में तो टिकट लगाकर मैच होते थे और खूब भीड़ होती थी। तब अम्बाला छावनी में यूनियन क्लब, हीरोज क्लब, एरियन्स क्लब व अन्य फुटबॉल टीमें थी जिन्होंने सारे हिंदुस्तान में फुटबॉल क्षेत्र में अपनी धाक जमाई थी और पश्चिम बंगाल की मोहन बगान तक को उन्होंने हराया था।

श्री विज ने कहा कि उन्होंने जो विश्लेषण किया कि फुटबाल के लिए बाकि स्थानों पर टर्फ लगा मगर अम्बाला छावनी में खिलाड़ी मिट्‌टी में खेलते रहे और खेल पिछड़ता रहा। उन्हें जब मौका मिला तो उन्होंने अम्बाला छावनी में बढ़िया फीफा एप्रूव्ड फुटबाल स्टेडियम बनवाया जोकि जल्द बनकर तैयार होगा। इसके स्टेडियम के आसपास सैकड़ों किलोमीटर तक एक भी फीफा एप्रूव्ड स्टेडियम नहीं है, फीफा से उन्हें बार-बार संपर्क किया जा रहा है ताकि यहां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुकाबले कराए जा सके। अम्बाला छावनी में जब बड़े मुकाबले होंगे तो यकीनी तौर पर बड़े खिलाड़ी निकलकर बाहर आएंगे।

उन्होंने कहा कि आजकल क्रिकेट ही हर जगह छाया है, मगर क्रिकेट केवल कॉमनवेल्थ देशों की गेम है जहां अंग्रेजों की हुकूमत रही जबकि फुटबाल सारे विश्व का खेल है। हमें यह नहीं मानना चाहिए कि बाकि खेल खत्म हो गए, इनका जो आधार है वह क्रिकेट से ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि क्रिकेट के खिलाड़ी पैसा कमाते है जबकि फुटबाल खिलाड़ी भी इनसे ज्यादा कमाते हैं। खिलाड़ी सकारात्मक ऊर्जा लगाए उसके लिए उन्होंने अम्बाला छावनी में फुटबाल स्टेडियम, ऑल वेदर स्वीमिंग पूल बनाकर दिया जहां खेलों इंडिया के दौरान स्वीमिंग मुकाबले हुए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर का जिम्नास्टिक हॉल बनाकर दिया। बैडमिंटन हॉल व योगशाला बनाकर दी। उन्होंने सुभाष पार्क में ओपन एयर थियेटर बनाकर दिया जहां आज मिस्टर अम्बाला बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता हो रही है।

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