नरवाई जलाने पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर होगी दंडात्मक कार्यवाही

 

नरवाई जलाने से मिट्टी के अमूल्य पदार्थ नष्ट होने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होती है

 

मंदसौर। उप संचालक कृषि श्रीमति अनिता धाकड़ ने बताया कि जिले में रबी की मुख्य फसल गेंहूं की कटाई का कार्य जारी है। कृषकों द्वारा कम्पाईन हार्वेस्टर मशीनों से फसल काटने के बाद खेत में खड़े खापे (नरवाई) को नष्ट करने के लिए तथा खेत की साफ-सफाई के लिए खेतों में आग जलाने की सैटेलाईट द्वारा रिपोर्ट प्राप्त हो रही है। उप संचालक कृषि द्वारा बताया गया कि नरवाई (पराली) जलाने से वायु प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति, जन-धन की हानि की घटनाएँ होती है। नरवाई में आग लगाने से अमूल्य पदार्थ नष्ट होता जा रहा है। इसके कारण मृदा स्वास्थ्य व मृदा उत्पादकता खतरे में है। नरवाई में आग लगाने से मृदा तापमान में वृद्धि होती है. जिससे लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते है, जो कि मृदा जैव विविधता के लिए एक गंभीर चुनौती है।

किसानों से की अपील नरवाई जलाने की सैटेलाईट से भी जिला प्रशासन को जानकारी प्राप्त हो रही है। ऐसे में नरवाई जलाने वालों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर प्रावधान अनुसार कार्यवाही की जाएगी। 2 एकड़ से कम भूमि पर राशि रूपयें 2500, 2 एकड़ से अधिक एवं 5 एकड़ से कम पर 5 हजार रू. तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूल कर शासकीय कोष में जमा की जाएगी।

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