नयी दिल्ली, 27 फ़रवरी,(वार्ता) देश की अधिकांश कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) को अपनाने में तेजी ला रही है लेकिन कुशल प्रतिभाओं को पाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।
दो साल बाद, जनरेटिव एआई एक चर्चा का विषय से एक व्यावसायिक अनिवार्यता में बदल गया है और भारतीय उद्याेग इसकी क्षमता को अपना रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े पेशेवर नेटवर्क लिंक्डइन के नए शोध के अनुसार भारत में 98 प्रतिशत कारोबारिओं का कहना है कि 2025 में अपने संगठनों को एआई अपनाने में तेज़ी लाने में मदद करना उनकी रणनीतिक प्राथमिकता है। हालाँकि, सही कौशल वाले प्रतिभाओं को ढूँढना एक चुनौती बनी हुई है।भारत में लगभग 5 में से 3 भर्तीकर्ताओं के लिए एआई और मानव कौशल का सही मिश्रण ढूँढना एक चुनौती है।
लिंक्डइन शोध के अनुसार भारत में 54 प्रतिशत एचआर पेशेवरों ने बताया कि उन्हें मिलने वाले नौकरी के आवेदनों में से केवल आधे या उससे भी कम आवेदन सभी आवश्यक और पसंदीदा योग्यताओं को पूरा करते हैं। सही तकनीकी (61 प्रतिशत) और सॉफ्ट स्किल (57 प्रतिशत) वाले उम्मीदवारों को ढूँढना उनकी सबसे बड़ी भर्ती चुनौती बनी हुई है। भारत में सबसे मुश्किल से मिलने वाले कौशल में तकनीकी/आईटी कौशल जैसे कि सॉफ्टवेयर विकास, इंजीनियरिंग (44 प्रतिशत), एआई कौशल (34 प्रतिशत) और संचार और समस्या-समाधान (33 प्रतिशत) जैसे सॉफ्ट स्किल शामिल हैं।
कंपनियाँ 2025 में ‘चुनिंदा भर्ती’ कर रही हैं।
भारत में एचआर पेशेवरों ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसे उम्मीदवारों से बहुत अधिक आवेदन (47 प्रतिशत) मिलते हैं जो उस भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हैं (41 प्रतिशत), और 2025 में वे अधिक चुनिंदा भर्ती कर रहे हैं। भारत में आधे से अधिक एचआर पेशेवरों का कहना है कि वे केवल उन उम्मीदवारों तक पहुँचने (55 प्रतिशत) और भर्ती (54 प्रतिशत) पर विचार करेंगे जो 80 प्रतिशत या उससे अधिक नौकरी योग्यताएँ पूरी करते हैं।
भारत में 10 में से 8 से अधिक (84 प्रतिशत) एचआर पेशेवर 2025 के लिए कर्मचारियों को नए कौशल विकसित करने में मदद करने को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हैं, जिसमें एआई (84 प्रतिशत) में कौशल विकास और संचार और सहयोग (82 प्रतिशत) जैसे आवश्यक सॉफ्ट स्किल पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह भावना भारत में सर्वेक्षण किए गए सभी (100प्रतिशत) एल एंड डी पेशेवरों द्वारा दोहराई गई है, जो इस बात से सहमत हैं कि सॉफ्ट स्किल (जैसे रचनात्मकता, जिज्ञासा और संचार) तकनीकी विशेषज्ञता के समान ही महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। लगभग आधे (48 प्रतिशत) भारतीय उद्योग का यह भी कहना है कि एआई प्रशिक्षण के लिए सीखने और विकास में निवेश करना अपनाने में तेज़ी लाने की कुंजी होगी।

