विक्रांत की पहली चुनौती गृह क्षेत्र में

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

पार्टी से छिटकते जा रहे आदिवासी जनाधार की पुनर्वापसी और अधिक मजबूत पैठ बनाने के उद्देश्य से कांग्रेस ने डॉ. विक्रांत भूरिया को आदिवासी कांग्रेस कमेटी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है. डॉ विक्रांत भूरिया वर्तमान में झाबुआ विधायक है तथा इसके पूर्व प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके है. उनकी कार्य शैली तथा संगठनात्मक कार्य करने की रूचि को देखते हुए उन्हे यह पद दिया गया है. पार्टी को उनकी नियुक्ति से कितना लाभ मिलता है, यह बाद में सामने आएगा. फिलहाल उनके समक्ष अपने गृह क्षेत्र में ही गुटबाजी दूर करने की चुनौती है.

उनके पिता वरिष्ठ आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया व क्षेत्र के दबंग नेता रहे वेस्ता पटेल परिवार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता दशकों से चली आ रही है. वेस्ता पटेल के पुत्र मुकेश व महेश पटेल को भूरिया परिवार जरा नहीं सुहाता. एक-दूसरे के खिलाफ हरदम मोर्चा खोले रहते हैं. विक्रांत को देश में अपने मिशन पर आगे बढऩे के पूर्व गृह क्षेत्र भीलांचल में ही आदिवासी एकजुटता में पसीना छूटने की संभावना है. यहां गैर राजनीतिक संस्था मप्र आदिवासी विकास परिषद के बैनर तले पहले से ही महेश पटेल कार्य कर रहे हैं, जो भूरिया के सामानांतर कांग्रेस चलाते आ रहे हैं. महेश पटेल मप्र आदिवासी विकास परिषद के उपाध्यक्ष हैं और क्षेत्र में अपनी आदिवासियों पर पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहेंगे. अब देखना होगा कि विक्रांत पटेल परिवार से कैसे सामंजस्य बैठा पाते हैं.

महेश पटेल का शक्ति प्रदर्शन

कांग्रेस में अपनी उपेक्षा से नाराज महेश पटेल इसके लिए जब-तब कांतिलाल भूरिया को दोषी ठहराते रहे हैं. पिछले समय वे प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की खिंचाई भी इस बात के लिए कर चुके हैं कि आदिवासियों की जमीन बेदखली के खिलाफ उनके आंदोलन से भूरिया के इशारे पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया था. चूंकि उमंग सिंघार उनके समर्थन में थे तो उनके लिए जी-जान लगाने की बात पटेल करते हैं. परिषद के अध्यक्ष उमंग सिंघार ही हैं और पटेल को वे ही आगे बढ़ा रहे हैं. महेश पटेल ने आदिवासियों के बीच अपनी पकड़ का पार्टी के वरिष्ठ कर्ताधर्ताओं को जलवा दिखाने के लिए कुछ दिनों पूर्व मप्र आदिवासी विकास परिषद के सम्मेलन के बहाने राणापुर में शक्ति प्रदर्शन भी किया था. इस दौरान कार्यक्रम में शामिल होने सैंकड़ों आदिवासियों के काफिले के साथ आ रहे महेश पटेल का आंबुआ, जोबट, उदयगढ़ में भव्य स्वागत किया गया. यही नहीं सम्मेलन में झाबुआ के पूर्व विधायक व भूरिया चिर प्रतिद्वंद्वी जेवियर मेड़ा ने भी शिरकत की.

समाज सुधार की ओर आदिवासी
सामाजिक संगठनों की पहल पर खरगोन- बड़वानी जिलों के आदिवासी समाज सुधार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. खरगोन जिले के महेश्वर में जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के तत्वावधान में बैठक में दहेज, शराब और डीजे जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. समाज में गलत काम करने वालों के खिलाफ रूढिग़त ग्राम सभा के माध्यम से दंडित करने व आदिवासी समाज को आर्थिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने पर विचार किया गया. इसी प्रकार बड़वानी जिले के ग्राम बायगोर में आदिवासी भील समाज द्वारा निर्णय लिया कि मांगलिक व गमी के आयोजन में लेन-देन के नाम पर हो रहे खर्चे पर रोक लगाई. इसके लिए मंगनी के समय शृंगार सामग्री और गहने देने पर प्रतिंबध लगाया है. साथ ही समाज में सट्टा व पत्ते खेलने पर सख्ती बरतने की बात कही गई. इन संगठनों के निर्णय की सभी सराहना कर रहे हैं. उनका मानना है कि समाज में व्याप्त इन कुरीतियों के कारण ही आदिवासी पनप नहीं पा रहे. निर्णय पर सही अमल होगा तो इनके विकास को नई दिशा मिलेगी.

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