
श्री लखदातार सेवा समिति भजनों के माध्यम से बता रही रिश्तों का महत्व
सुसनेर,14 फरवरी. आधुनिक युग में एक और जहां पाश्चात्य संस्कृति के पीछे लोग भागे जा रहे हैं तो वही दूसरी ओर हमारे शहर में अब क्रेज बदल रहा है. नवयुगल दम्पत्ति अपनी शादियों में महिला संगीत की बजाय खाटू श्याम कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और भक्तामर पाठ जैसे धार्मिक आयोजन करवा रहे हैं. साल 2025 में शुरू हुए इस शादियों के सीजन में हमारे शहर में ही सुसनेर की श्री लखदातार सेवा समिति दर्जनभर शादी वाले परिवारों में महिला संगीत की बजाय होने वाले भजन कीर्तन में शामिल होकर धार्मिक संस्कृति का पालन करने की अपील कर चुकी है.
आपको बता दें की शादी के समय एक और जहां महिला संगीत का खर्च भी ज्यादा आता है तो वहीं दूसरी और इस तरह के धार्मिक आयोजनों से धर्म के प्रति लोगों का रूझान भी बढ़ रहा है और शादियों में शामिल होने वाले लोग भी इसकी सराहना करते हैं.इस तरह के आयोजनों से लोग पाश्चात्य संस्कृति वालो गानों की बजाय धार्मिक भजनों पर थिकरते हुए नजर आते हैं.
इन आयोजनों में बाबा श्याम का दरबार सजाकर के ज्योत जलाई जाती है. जिसमें श्रृद्धालु अपनी मंगल कामनाओं के साथ आहुतियां देते है. श्री लखदातार सेवा समिति के मधुर भजन गायक लखन भावसार, प्रदीप बजाज, सत्यनारायण सोनी, अभिषेक गहलोत और कमल चौहान के द्वारा धार्मिक भजनों के माध्यम से बेटा बेटियों एवं माता पिता के रिश्तों का महत्व समझाया जाता है. गत दिवस एक निजी गार्डन में शादी वाले परिवार में आयोजित एक बेटी की शादी के अवसर पर खाटू श्याम भजन कीर्तन का आयोजन किया गया. जिसमें शुभांजली राठौर और रक्षिता सोनी ने बेटी विषय पर भजन प्रस्तुत किया तो सभी की आंखो से अश्रुओं की धारा बहने लगी.
गृह प्रवेश पर सुंदरकाण्ड पाठ…
हमारे शहर में चाहे गृह प्रवेश हो या फिर किसी बच्चे का मुुंडन संस्कार हो ऐसे अवसर पर भी सुुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन किया जाता है. इस तरह के आयोजन शहर में इतने बढ गए हैं की अब शहर में एक या दो नहीं बल्की 5 के लगभग सुंदरकाण्ड मंडिलया संचालित हो रही है. जो हर जगह आमजन को धर्म से जुडे रहने हेतु प्रेरित कर रही है. इनके अलावा शहरवासियों की आस्था के केन्द्र श्री खेडापति हनुमान मठ मंदिर में प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर सुंदरकांड पाठ होता है. अन्य मंदिरो में विशेष दिनो में इस तरह के आयोजन किए जाते हैं.
