स्वामी दयानंद सरस्वती: सामाजिक क्रांति के प्रणेता

जबलपुर: जब हमारा पराधीन देश सामाजिक पतन, अंधविश्वास और रूढ़िवाद के अंधेरे के गर्त में था। अंग्रेज़ों का अंधानुकरण ही भारतीयों की नियति बन रहा था। तब, स्वामी दयानंद सरस्वती देशवासियों के लिए आशा, विश्वास एवं संकल्प के प्रकाशपुंज बनकर उभरे। छुआछूत, जातिवाद, बाल विवाह, विधवाओं की दयनीय स्थिति जैसी बुराइयों को दूर करने हेतु उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उपरोक्त विचार वक्ताओं ने स्वामी जी की 200 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।

आर्य समाज प्रसार सेवा द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में चित्र एवं संदेश प्रदर्शनी, विभिन्न प्रतियोगिताएं, योग तथा होम्योपैथिक शिविर की आयोजना की गई। अपर आयुक्त अंजू सिंह, जादूगर एस. के. निगम, आचार्य धीरेंद्र पांडे, इंजी. विकास खंडेलवाल, फिल्म कलाकार अन्नू अनवर शाह आदि वक्ताओं ने अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की व्यवस्था में डॉ. अरुण कुमारी सिंह, पंचम झा,तुलसी नारायण राय, अनिल श्रीवास्तव, पूनम माहेश्वरी, रंजना ब्रजेश गुप्ता, अफजल खान, ज्योति शर्मा, डॉ. नंदिता, अंजना आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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