शीतलता को लेकर लोग खरीदते मटकियां, रहती बेहद मांग, अभी से तैयारियों में जुट गए कारीगर
उज्जैन: शहर के कुंभकार की मटकियां शीतलता के लिए प्रसिद्ध है, गर्मियों में पूरे शहर में इनकी भरपूर मांग रहती है। कुंभकार इन दिनों जोर-शोर से इन्हें बनाने में जुटे हुए हैं। इस पर इन दिनों इनकी व्यस्तता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। गर्मी शुरुआत पर शीतल जल को लेकर आम से खास की पसंद मिट्टी की मटकियां होती है। लोग इन्हें बड़े शौक से खरीदते व इसके ठंडे पानी की पीते हैं। फ्रिज की अपेक्षा मटकी का ठंडा पानी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होने पर अधिकांश लोग इसका पानी पीते हैं।
दीपावली पर्व धूमधाम से मनाने के बाद कुंभकार इस काम में जुटते हैं। अगले तीन महीने तक प्रतिदिन काम करके मटकियों का स्टॉक तैयार करते हैं। मांग बढऩे पर जरूरत अनुसार इन्हें उपलब्ध करवाया जा सके। काली मिट्टी, लकड़ी के बुरादे व अन्य सामग्री मिलाकर यह मटकी तैयार करते हैं। उज्जैन शहर में सैकड़ों परिवार इस काम को करते हैं।
दीपावली से शुरुआत
दीपावली पर्व धूमधाम से मनाने के बाद मटकी बनाना शुरू करते हैं। अगले 3 महीने तक मटकियां बनाकर स्टॉक तैयार करते हैं। इससे की व्यापारियों की मांग के अनुसार इन्हें आसानी से उपलब्ध करवा सके।
-कैलाश प्रजापत, कारीगर
5 दिन में तैयार होती है एक मटकी
मटकी को बनाने के लिए पहले मिट्टी भिगोने के साथ इसे अच्छी तरह गूंथना होता है। जब वह अच्छी तरह से गल कर तैयारी होती है इसके बाद कुंभकार पहले इसे चौक से छोटे आकार में बनाते हैं। फिर एक हाथ मटकी के भीतर व दूसरे हाथ में पकड़े लकड़ी के पट्टे से बाहर ठोक ठोक कर इसे मटकी का रूप देते हैं। इसके बाद इसे सुखाते हैं। इस पर 5 दिन में मटकी पककर तैयार होती है। प्रतिदिन एक कारीगर करीब 25 से 30 मटकियां तैयार करता है।
मांग कम नहीं हुई
समय बदला है, लेकिन आज भी मटकियों की मांग कम नहीं हुई है। वर्ष दर वर्ष इनकी मांग बढ़ती जा रही है। आमजन की पहुंच तक इसके होने पर लोग इसे खरीदते वह इसका शीतल पानी पीते हैं। इससे अच्छी बिक्री होती है।
-जीतमल प्रजापत, कारीगर
