महाकुंभ तीर्थयात्रा ही नहीं, आत्मयात्रा भी’, सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने इन सवालों का दिया जवाब

महाकुंभ धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का संगम है। यह तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आत्मयात्रा है। यह याद दिलाता है कि हम केवल शरीर नहीं, बल्कि अनंत चेतना हैं। जो इस सत्य को समझ लेता है, वही सच्चे अर्थों में महाकुंभ के उद्देश्य को पूर्ण करता है। यहां साधु-संत, विद्वान और भक्त आत्मबोध, विचार-विमर्श और सत्संग के मंथन के लिए जुटते हैं। इस मंथन से जो भी निकले, वह सबके लिए होगा। यह कहना है आनंदधाम के पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज का।

Next Post

स्पर्श कुष्ठ जागरूकताअभियान 30 जनवरी2025 से 13 फरवरी2025

Mon Feb 3 , 2025
तक चलाया जाएगा बागली: शासन के आदेश अनुसार कुष्ठ जागरूकता अभियान के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागली में 30 जनवरी 2025 को जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेंद्र गुजराती ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर हेमंत पटेल डी सी एम ओम प्रकाश मालवीय द्वारा महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर अभियान का […]

You May Like