
महाकुंभ धार्मिक नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का संगम है। यह तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आत्मयात्रा है। यह याद दिलाता है कि हम केवल शरीर नहीं, बल्कि अनंत चेतना हैं। जो इस सत्य को समझ लेता है, वही सच्चे अर्थों में महाकुंभ के उद्देश्य को पूर्ण करता है। यहां साधु-संत, विद्वान और भक्त आत्मबोध, विचार-विमर्श और सत्संग के मंथन के लिए जुटते हैं। इस मंथन से जो भी निकले, वह सबके लिए होगा। यह कहना है आनंदधाम के पीठाधीश्वर सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज का।
